Wednesday, December 07, 2005

पहली पहली बार

मेरा नाम रेशमा है। मैं इस्लामाबाद पाकिस्तान से हूॅ। मैं विवाहित हूॅ । मेरी उम्र २६ वर्ष है। यह बात तब की हेै जब मैं कालेज में थी। मुझे अपने क्लास के एक लडके मोइन से प्यार हो गया। हम दोनो अक्सर कालेज से द्यूमने के लिये निकल जाते थे। फिर दोनो पिक्चर देखने के लिये भी जाने लगे। हम दोनो धीरे धीरे बहुत करीब आते गये। मोइन मुझे हमेशा हाथो पर और फिर धीरे धीरे गालो पर चूम लेता था। एक दिन उसने मुझे मेरे होठों पर चूम लिया। अब वह थोडा निडर हो गया था। एक दिन उसने मुझे कस कर पकड लिया और मेरे होठो को चूम लिया फिर उसने मेरे कन्धों पर फिर मेरी गर्दन को चूम लिया।उसने मेरे उरोजो का छू लिया । पहली बार किसी ने मेरे बूब्स को छुआ था मुझे बहुत अच्छा लगा था। धीमे धीमे वह और आगे बढ़ गया था। अब वह अपने हाथो से मेरी जाद्यों को कभी कभी वह अपने हाथो से मुझे पीछे से कमर के नीचे के भाग को दबा देता था। मुझे बहुत मजा आता था मैंने कभी विरोध नहीं किया।

एक दिन हम दोनेा पिक्चर के लिये गये। हम सबसे पीछे की सीट पर बैठे थे। हॉल में भीड बहुत कम थी। और हमारे आस पास कोई नहीं बैठा था। पिक्चर शुरू होने के १० या १५ मिनट बाद मोइन ने अपना हाथ मेरे कन्धो पर रखा और अपनी तरफ खींचा। थियेटर मे काफी अन्धेरा था। वह मेरे गालों पर चूमने लगा उसने मेरे होठों पर अपने होठ रख दिये उसकी सॉसे बहुत गरम थी। हम दोनेा ने एक दूसरे को बहुत बेताबी से किस्स करना शुरू कर दिया। तभी मैंने उसका हाथ अपने दुपट्टे के नीचे महसूस किया।उसका हाथ मेरे उरोजो को कमीज के ऊपर से दबाने लगा। इस दौरान भी वह मुझे चूम रहा था। मैने अपनी ऑखे बन्द कर ली मुझे बहुत मजा आ रहा था। अचानक मुझे महसूस हुआ कि उसका हाथ मेरी कमीज के ऊपर के दो बटनों को खोल चुका था । उसका हाथ मेरी ब्रा के कोनो के अन्दर मेरे बूब्स को सहला रहे थे। धीरे धीरे उसका हाथ मेरे निप्पल को अंगुलियों से छेडने लगा जिससे वे एकदम कठोर हो गये। मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूॅ। मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी तरंगे दौड़ रही थी। जो कि मेरी जिन्दगी में पहली बार हुआ था।उसने अपने हाथ को मेरी कमीज से निकाला और मेरे पेट पर रखा और इधर उधर द्युमाता रहा। फिर उसका हाथ नीचे की ओर बढने लगा। मेरे अन्दर अजीब सी फीलिंग हो रही थी। उसने अपना हाथ मेरी जांद्यो पर रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर ले गया।उसने मेरे प्राइवेट भाग को मेरी सलवार के ऊपर से ही छूआ । मेरे मुॅह से उॅहहहहह करके आवाज निकली मेरे पैर फैल गये और उसकी हथेली ने उस जगह को भर लिया। अपनी अंगुलियों से वह मेरे प्राइवेट अंग को रगड रहा था । उसका ऐसा करना मुझे पागल बना रहा था।मेरा बदन मेरे वश में नहीं था मैं अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी थी।

अचानक उसने मुझसे अपनी कमीज की बटन बन्द करने और उसके साथ बाहर चलने को कहा। मैने वैसा ही किया। हमने टैक्सी ली और कॉलेज की ओर चल पडे। शाम हो गयी थी कॉलेज बन्द हो चुका था केवल एक दो बच्चे थे। हम दोनो कॉलेज के पीछे की ओर से कॉलेज की छत की ओर गये। कॉलेज बन्द हो चुका था किसी के उधर आने की उम्मीद नहीं थी।हमने ऐसी जगह चुनी जहॉ से हमें कोई देख नही पाये। हम दोनेा दीवार के सहारे खडे हो गये और बगैर वक्त बर्बाद किये एक दूसरे को बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया। उसने मेरे दुपट्टे को उतार दिया। मेरी कमीज की सारी बटन खोल डाली और अपना हाथ मेरी कमीज में डालकर मेरे उरोजो को हाथ में ले लिया। उसने इतनी जल्दी में यह सब किया कि मुझे कुछ समझ ही नही आ पाया। उसके इस तरह से छूने से मुझे करंट सा लगा। उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और बडी बेदर्दी से मेरे बूब्स को मसलने लगा। मेरे बूब्स एकदम सख्त हो गये। वह अब मेरे उरोजो को चूमने लगा और मेरे एक निप्पल को मुॅह में ले लिया और बडी सख्ती से उन्हें चूसने लगा।उसका हाथ मेरे चूतड को मसल रहा था।

उसने मुझे पीछे से अपनी बॉहों में जकड लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा। उसका सख्त हो चुका अंग मेरे पीछे चूतड में चुभने लगा। उसका हाथ मेरी कमीज के नीचे मेरे पेट पर टहल रहा था।शलवार के ऊपर से ही वह मेरे प्राइवेट भाग को रगड रहा था। मेरी शलवार का वह हिस्सा गीला हो गया जहॉ उसने अपना हाथ रखा था और मेरी चूत को रगड रहा था। मोइन ने मेरी शलवार खोल दी और मैंने उसे नीचे गिर जाने दिया। उसकी अंगुलियॉ सीधे मेरी पैंटी के अन्दर पहुॅच गये और अगले ही पल उसकी अंगुलियॅा मेरी चूत के अन्दर पहुॅच गयी। उन्हें वह अन्दर बाहर करने लगा। मैंने महसूस किया कि उसका सख्त लण्ड मेरी कमर में चुभ रहा है और धक्के लगा रहा था। उसने मेरी पैंटी को नीचे खींच दिया। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैंने पलट कर उसकी पैंट खोल डाली और उसके अन्डरवियर में हाथ डालकर मैंने उसके अंग को हाथो में ले लिया।उसने अपना पैंट नीचे गिरा दिया और मेरी पैंटी को उतार दिया।उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया मैंने अपनी टांगो को उसकी कमर में लपेट लिया। उसका कठोर अंग मेरी चूत के मुॅह को ढूढने लगा। मैंने उसे अपने हाथ से पकडा और अपनी चूत का रास्ता दिखाया। और एक झटके से उसका मोटा और कठोर लण्ड मेरे अन्दर प्रवेश कर चुका था। मुझे लगा कि कोई जलती हुई चीज मेरे अन्दर द्युस गयी। मैं दर्द से तड़प उठी।

उसने मेरे मुॅह को एक हाथ से दबाया और मेरी कमर को एक हाथ से थाम लिया । अगले ही पल मेरी निप्पल उसके मुॅह में थे। वह उन्हें जोरें से चूसने लगा। उसका लण्ड अभी भी मेरे अन्दर ही था।उसने मेरी कमर को कस कर पकड रखा था। जिससे मैं ऊपर ही नही उठ पा रही थी। धीरे धीरे मुझे मजा आने लगा मेरा दर्द जाने कहॉ चला गया। मैं अपने आाप को ऊपर नीचे करने लगी। उसने वही जमीन पर मुझे लिटाया और मेरे पैरों को फैलाया और उसका लण्ड अगले ही पल मेरी चूत में था। उसका पूरा लण्ड मेरे अन्दर तक समा रहा था । उसने मेरी कमर को हाथोंसे पकडा और जोरो से धक्के देने लगा। इस बीच मेरी चूत से पानी निकल गया उसने अपनी स्पीड बढा दी। उसके लण्ड का उपर का सिरा मेरे अन्दर तक पहुॅच रहा था उसका लण्ड मेरे अन्दर और कठोर और सख्त होता जा रहा था । हम दोनो एक दूसरे को बहुत जबरदस्त धक्के दे रहे थे। अचानक मैंने उसको कसकर पकड लिया उसने अपनी स्पाीड चालू रखी और अगले ही पल उसका वीर्य मेरी चूत में भर गया तभी मैं एक बार फिर झर गयी। वह मेरे ऊपर ही निढ़ाल हो गया।

हम दोनों बुरी तरह से हॉफ रहे थे। हम दोनो ने कपडे पहने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये। हम दोनो एक दूसरे से पूरी तरह से सन्तुष्ट थे।

Sunday, November 27, 2005

मेरी सेक्सी पड़ोसन : एक कहानी

दोस्तों मेरा नाम रजत है।मेरी उम्र २३ वर्ष कद ५' ८" है। मैं आपको परीती के साथ अपने सेक्स अनुभब को अपनी पिछली कहानी मे बता चुका हूं।अब मैं अपने जिन्दगी के एक और सेक्स अनुभव को आपको बताने जा रहा हूॅ।तब मेरी उम्र १९ वर्ष थी मेरे अन्दर सेक्स का कीडा भडक रहा था। मेरी छुटि्टयॉ चल रही थी। हमारे घर के सामने वाले घर मे एक लड़की रहती है।उसका नाम पूजा है। हम दोनो बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त हैं। इस बार मैं द्यर दो सालों के बाद आया था। मतलब की हम दोनो पूरे दो सालों के बाद मिले थे। और अब वह पहले वाली पूजा नहीं थी अब वह बला की खूबसूरत हो गयी थी।

उसका भरपूर १७ वर्ष के जिस्म ने मेरे अन्दर की आग को और भडका दिया था। उसके बूब्स काफी बडे थे वो उसकी टाईट टीशर्ट में बिल्कुल गोल दिखते थे जिन्हे देखकर उन्हे हाथ में पकडने को जी चाहता था। वह अकसर शार्ट डे्रस पहना करती थी।बचपन में मैने बहुत बार खेलते हुए पूजा के बूब्स को देखा था जो कि शुरू से ही आम लड़कियों के बूब्स से बड़े थे और कभी कभी छू भी लेता था लेकिन मेरा मन हमेशा उनको अच्छी तरह दबाने को करता रहता था लेकिन मुझे डर लगता था कि कहीं वो अपने द्यर वालों न बता दे क्योंकि मेरी उसके बड़े भाई के साथ बिलकुल भी नहीं बनती थी। वो पूजा को भी मेरे साथ न बोलने के लिये कहता रहता था लेकिन पूजा हमेशा मेरी तरफ ही होती थी। लकिन अब पूजा बड़ी हो चुकी थी और जवानी उसके शरीर से भरपूर दिखने लगी थी।मैं उस को चोदने के लिये और भी बेकरार हो रहा था। लेकिन अब वह पहले की तरह मेरे साथ पेश नहीं आती थी।एसा मुझे इस लिये लगा क्योंकि वो मेरे ज्यादा पास नहीं आती थी।दूर से ही मुस्करा देती थी।

लेकिन एक दिन मेरी किस्मत का सितारा चमका और मैने पहली बार एसा द्रिष देखा था।उस दिन मैं तकरिबन ११ बजे सुबह अपनी छत पर धूप में बैठने के लिये गया क्योंकि उन दिनों सर्दियां थी। मैं अपनी सब से ऊपर वाली छत पर जा कर कुरसी पर बैठ गया।वहां से सामने पूजा के द्यर की छत बिलकुल साफ दिख रही थी।मैं सोच रहा था कि पूजा तो स्कूल गयी होगी लेकिन तभी मैने नीचे पूजा की आवाज सुनी मैने नीचे देखा पूजा के मम्मी पापा कहीं बाहर जा रहे थे। थोड़ देर बाद पूजा अन्दर चली गयी।मैं सोच रहा था कि आज अच्छा मौका है और मैं नीचे जाकर पूजा को फोन करने के बारे मे सोच ही रहा था कि मैने देखा पूजा अपनी छत पर आ गयी थी।मैं उस को छुप कर देखने लगा क्योंकि मै पूजा को नही दिख रहा था।उस दिन पूजा ने शर्ट और प्जामा पहन रखे थे और ऊपर से जैकिट पहन रखी थी।वह अभी नहाई नही थी।तभी उस ने धूप तेज होने के बजह से जैकिट उतार दी और कुरसी पर बैठ गयी। उस ने अपनी टांगे सामने पड़े बैड पर रख ली और पीछे को हो कर आराम से बैठ गयी जिस की बजह से उस के बड़े बड़े बूब्स बाहर को आ गये थे।

मेरा दिल उनको चूसने को कर रहा था और मैं बड़े गौर से उस के शरीर को देख रहा था।तभी अचानक पूजा अपने बूब्स की तरफ देखने लगी और उसने अपने हाथ से ठीक करने लगी।उसके चारों तरफ ऊंची दीवार थी इसलिये उसने सोचा भी नही होगा कि उस को कोई देख रहा है।उसी व्कत उस ने अपनी शर्ट के ऊपर वाले दो बटन खोल दिये।मेरे को अपनी आंखो पर विशवास नहीं हो रहा था कि मै यह सब देख रहा हूं। मैने अपने आप को थोड़ा संभाला। लेकिन तब मैं अपने लण्ड को खड़ा होने से नही रोक पाया जब मैने देखा कि उस ने नीचे ब्रा नहीं डाला हुआ था और आधे से ज्यादा बूब्स शर्ट के बाहर थे।मैने अपने लण्ड को बाहर निकाला और मुठ मारने लगा।

जब मैने फिर देखा तो पूजा का एक हाथ शर्ट के अन्दर था और अपने एक मुम्मे को दबा रही थी और आंखे बन्द कर के मझे ले रही थी ।तभी उस ने एक मुम्मे को बिलकुल शर्ट के बाहर निकाल लिया जो कि बिलकुल गोल और बहुत ही गोरे रंग का था।उसका निप्पल बहुत ही बड़ा था जो कि उस समय इरैकट था और हलके भूरे रंग का था। मैं यह सब देख कर बहुत ही उतेजित हो रहा था और अपनी मुठ मार रहा था। तभी उसने अपनी शर्ट का एक बटन और खोल दिया और अपने दोनो बूब्स बाहर निकाल लिए। फिर उसने अपने दोनो हाथों की उगलिुयों से निप्पलस को पकड़ कर अच्छी तरह मसलने लगी। काफी देर तक वो अपने बूब्स को अच्छी तरह दबाती रही। थोड़ी देर बाद वह कुर्सी से उठी और बैड पर लेट गयी। एक हाथ से उसने अपने बूब्स दबाने शुरू कर दिए और दूसरा हाथ उसने अपने पजामे मे डाल लिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी।

अब उस को और भी मस्ती चड़ने लगी थी और वह अपनी गांड को भी उपर नीचे करने लगी थी।मैं अभी सोच ही रहा था कि खड़ा हो कर उस को दिखा दूं कि मैं उस को देख रहा हूं तभी मेरा हाथ मे ही छुट गया और मैं अपने लण्ड को कपड़े से साफ करने लगा। जब मैने फिर देखा तब तक पूजा खड़ी हो गयी थी लेकिन उसके बूब्स अभी भी बाहर ही थे और वो वैसे ही नीचे चली गयी। लेकिन फिर भी मै बहुत खुश था लेकिन फिर मेरे को लगा कि मैने पूजा को चोदने का मौका गवा दिया। मुझे खड़ा हो जाना चाहिए था। एसा करना था वैसा करना था। तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया। और मैं जलदी से नीचे गया और पूजा के द्यर फोन कर दिया। पहले तो वह मेरी आवाज सुन कर थोड़ी हैरान हुई क्योंकि फोन पर हमारी ऐसे कभी बात नही हुई थी लकिन वह बहुत खुश थी। लेकिन मैं उस से सेक्स के बारे में कोई भी बात नही कर सका। इधर उधर की बातें करता रहे। उस दिन हम ने २ द्यटें बातें की और फिर उसका भाई विशाल आ गया था। शाम को उसने मुझे फिर फोन किया और हमने १ द्यटां बति की और फिर रोजाना हमारी फोन पर बातें होने लगी और द्यर पर भी अकसर आमने सामने हमारी बातें हो जाती थी। छत पर भी हम एक दूसरे को काफी काफी देर देखते रहते थे। लेकिन मेरे को उसके भाई से बहुत डर लगता था इस लिए जब वह द्यर पर होता था मै पूजा से दूर ही रहता था।

एक बार विशाल की बजह से हमारी पूरे २ दिन बात नही हुई और हम दोनो बहुत परेशान थे और हम छत पर भी नही मिल पाए और विशाल ने उस को हमारे द्यर भी नहीं आने दिया था। उस दिन मैं पूरा दिन बहुत परेशान रहा क्योंकि पूजा मुझे सिर्फ एक बार दिखी थी और हमारी बात भी नही हुई थी।रात के ९ बज चुके थे। मै बैठा पूजा के बारे मे सोच रहा था।तभी बाहर की द्यटीं बजी। जब मैने गेट खोला तो देखा बाहर पूजा खड़ी थी।

उसने मुझसे सिर्फ यह कहा "आज रात साढ़े बारह मै फोन करूंगी रजत मेरा मन नहीं लग रहा है " और वापस चली गयी।

मैं एक दम से हैरान रह गया। मुझे विशवास नही हो रहा था। लेकिन मै बहुत खुश था। पहली बार किसी से रात को बात करनी थी। गेट बन्द करके अन्दर गया और मम्मा से कहा पता नही कौन था द्यटीं बजा कर भाग गया। ११ बजे सभी सो गए लेकिन मुझे नींद कैसे आ सकती थी।मैने दूसरे फोन की तार निकाल दी थी और अपने कमरे वाले फोन की रिंग बिलकुल धीमी कर दी थी और कमरे का दरवाजा भी बन्द कर लिया था। तकरीबन १२:३५ पर फोन आया और पूजा बहुत ही धीमे स्वर मे बोल रही थी और उसने बताय्या कि "विशाल ने हम दोनो को बात करते हुए देख लिया था।इसलिए उसने मुझे तुमसे मिलने और फोन पर बात करने से मना किया है वह कहता है कि तुम अच्छे लड़के नहीं हो। लेकिन मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो। तुमसे बात करके बहुत अच्छा लगता है। मै तुम से बात किए बगैर नही रह सकती। इसलिए रजत हम रात को बात किया करेंगे और इस समय हमें कोई डिसटर्ब भी नही करेगा खास कर विशाल"

ऐसे ही हमारी बहुत देर बातें होती रहीं और अब पूजा पूरी तरह मेरे जाल मे फस चुकी थी। तब मैने पूछा कि तुम कमरे मे अकेली ही हो न इतनी धीमे क्यों बोल रही हो। उस ने कहा कि मेरे कमरे का दरवाजा खुला है और मम्मी पापा साथ वाले कमरे मे हैं। तो मैने उसको दरवाजा बन्द करने को कहा। उसने पूछा क्यों तो मैने कहा कि उसके बाद मैं तुम्हारे पास आजाऊंगा बैड के उपर बिलकुल तुम्हारे साथ। तो वह कहने लगी नहीं मुझे तुमसे डर लगता है। तुम मेरे साथ कुछ कर दोगे। तब मैने उससे कहा कि मै कभी तुम्हारे साथ जबरदसती नही करूंगा। जो तुम्हे अच्छा लगेगा हम वह ही करेंगे। मैने पूजा को अपना हाथ पकड़ाने के लिए कहा।

उसने कहा "पकड़ लो लेकिन आराम से पकड़ना" थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने कहा "तुम्हारे हाथ पकड़ने से रजत मेरे को कुछ हो रहा है प्लीज अभी मेरा हाथ छोड़ दो"

मैने कहा ठीक है छोड़ देता हूं। लेकिन पूजा मैं तुम से लड़कियों के बारे मे एक बात पूछना चाहता हूं। बताओगी।

उसने कहा "पूछो क्या पूछना चाहते हो।"

मैने हिचकचाते हुए कहा मैं पिरीअडज के बारे मे सब कुछ जानना चाहता हूं। पहले पूजा चुप कर गई लेकिन थोड़ी देर बाद उसने मुझे सब कुछ बतायया और उसके बाद हमारी सेक्स के बारे मे बातें शुरू हो गई। मैने उसको कहा कि मैने उसके बूब्स देखे हैं। तो उसने कहा आप झूठ बोल रहे हो। तब मैने छत वाली बात बता दी कि मै सब कुछ देख रहा था। वह थोड़ा शरमा गई और कहने लगी कि आप बहुत खराब हो। उसने कहा कि ऐसा करने से उसको मजा आता है। थोड़ी देर बाद उसने कहा कि जब मैने पहले उसका हाथ पकड़ा था तब उसकी टांगो के बीच में कुछ हो रहा था उसको बहुत मजा आ रहा था और उसकी चूत में से बहुत पानी निकल रहा था जिस की बजह से वह द्यबरा गई थी और इसी लिए उसने मुझे हाथ छोड़ने को कहा था।

तब उसने फिर से हाथ पकड़ने को कहा। मैने कहा ठीक है पकड़ा दो। थोड़ी देर बाद उसने कहा कि उसकी पैंटी चूत के पानी से बिलकुल गीली हो गई है और उसके निप्पलज भी बिलकुल इरैकट हो गए हैं।तब मैने उसको अपने कपड़े उतारने को कहा।तब उसने उठ कर दरवाजा बन्द कर लिया और सारे कपड़े उतार दिए।फिर उसने बूब्स दबाने शुरू कर दिए और सेक्सी सेक्सी आवाजें निकालने लगी।मेरा लण्ड भी बिलकुल खड़ा हो चुका था।तब पूजा अपनी उंगली से चूत के ऊपर क्िलटरीज को दबाने लगी और फिर उसने उंगली चूत के अन्दर डाल ली।

उसके मुंह से आवाजें आ रही थी।आहहहहहहहहहहहहहहह आह आहहहह वह कह रही थी " रजत प्लीज चोदो मेरे को।अपना लण्ड मेरी चूत मे डालो।मेरे मुम्मों को चूसो।जोर जोर से चोदो मेरे को।"

उस रात हमने सुबह ५ बजे तक बात की।उसको बाद हम अकसर रात को बातें करते थे।लेकिन मैं उस दिन के इंतजार मे था जिस दिन मै उसको असली मे चोदूं। आखिर वह दिन आ ही गया जब मेरा सपना सच हो गया। पूजा के एक रिश्तेदार अचानक बीमार हो गये उसके मम्मी और पापा को उन्हें देखने के लिये जाना पडा। और किसी भी हालत में उनके तीन दिन तक लौटने कि कोई उम्मीद नही थी।विशाल दिन भर दुकान पर था।पूजा द्यर मे अकेली थी। लेकिन मम्मा की बजह से मै उससे बात नहीं कर पा रहा था। मैं अपने कमरे मे चला गया।

मैंने एक सेक्स मैगजीन निकाला और देखने लगा। उसमें कुछ आपत्तिजनक तस्वीरे थी। मैं उन्हें देख रहा था तभी अचानक पीछे से पूजा आ गई उसने पूछा क्या देख रहे हो और वह मेरे बेड पर बैठ गयी।मैने पूछा कि मम्मा से क्या कहा है तब उसने कहा कि आन्टी ने उसको जहां आते हुए नही देखा।तभी मैं उठा और मम्मा से कहा कि मैं सोने लगा हूं और मैने दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया।फिर मैने उसके सामने वह किताब रख दी वह उसे देखने लगी। फिर हम दोनो सेक्स के बारे में बातें करने लगे। मैं उठकर उसके पीछे खडा हो गया मैने उसके कन्धे पर अपना हाथ रखा और झुककर उसके कन्धों को चूम लिया। उसने कुछ भी प्रतिरोध नहीं किया यह मेरे लिये बहुत था।

मै उसके सामने बैठ गया और उसके होठो को चूम लिया। मेरा हाथ तेजी से उसकी कमर में पहुॅच गया और कसकर पकडकर उसे अपनी ओर खींच लिया। मेरे हाथ उसके बूब्स पर पहुॅच गया और ऊपर से ही दबाने लगा।

उसके मॅुह से प्रतिरोध के शब्द निकले उसके मुॅह से निकला ओहहहहहहहहहहह नहीं बस करो रजत।

लेकिन उसके हाथो ने उतना एतराज नहीं जताया। उसने एक ढीली ढाली टीशर्ट और साइकलिंग शार्ट पहन रखा था। मेरा हाथ उसकी टीशर्ट के अन्दर उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके उभारों को दबाने लगा। मेरी जीभ उसके मुॅह में द्यूम रही थी। अब उसके तरफ से भी सहयोग मिलने लगा था। मैंने उसकी टीशर्ट निकाल दी उसने पहले ना नुकुर की लेकिन मेरे हाथ का जादू उसके दिलो दिमाग पर छा रहा था। उसका प्रतिरोध नामात्र का था। मैं उसके बूब्स को उसकी ब्रा के ऊपर से ही मुॅह मे लेने लगा। और मेरा दूसरा हाथ उसकी जांद्यो के बीच के भाग को उसके कपडो के ऊपर से ही सहलाने लगा। मेंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया उसका भरपूर यौवन मेरे सामने था। जिनको मैंने बिना एक पल की देरी किये अपने मुॅह में ले लिया। वह अपने वश में नहीं थी उसने मुझे कसकर पकड लिया।

मैने उसके बाकी बचे कपडो को उतार फेंका और उसे बेड पर लिटाया। मैंने अभी तक अपने कपडे नहीं उतारे थे मैने अपने कपडे उतार दिये । मैं अब सिर्फ अन्डरवियर में था।और उसके ऊपर वापस झुक गया। और उसके निप्पल को मुॅह में ले कर चूसने लगा। मेरे हाथ उसकी जांद्यो के बीच की गहराइयों तक पहुॅच गये और उसके जननांग को सहलाने लगे। उसने अपना हाथ मेरी अन्डरवियर में डालकर मेरे हथियार को बाहर निकाल लिया। मैं नीचे गया और अपने होठ उसके जननांगों पर रख दिये उसके मुॅह से एक सीत्कार निकल पडी। उसने मुझे अपने पैरो में फॅसा लिया। मेरी जीभ उसकी चूत के अन्दर बाहर हो रही थी। उसने पानी छोड दिया मेरी जीभ को नमकीन स्वाद आने लगा। उसने मेरे लण्ड को अपनी चूत में डालने के लिये मुझे ऊपर की ओर खींच लिया। और बोलने लगी प्लीज इसे अन्दर डालो अब बरदाश्त नहीं होता।

मैंने एक पल की भी देरी नहीं की उसके टांगो को फैलाया और अपने लण्ड को उसके चूत के ऊपर रखा । एक धीमा सा धक्का दिया वह पहले झटके को आसानी से सहन नहीं कर पायी और दर्द से कराह उठी और चिल्लाने लगी ़़़़ ज़ल्दी निकालो मैं मर जाऊॅगी। मैंने उसको कस कर पकडा और उसके निप्पल को मुॅह में लेकर अपनी जीभ से चाटने और दांतों से काटने लगा। थोडी देर में ही वह अपनी कमर को आगे पीछे हिलाने लगी। मेरा लण्ड जो कि अभी तक रमा की चूत के अन्दर ही था और बडा होने लगा था। मेरे लिये अब यह पल बरदाश्त के बाहर था। मैंने भी आगे पीछे जोरो से धक्के लगाने लगा। मेरी स्पीड लगातार बढ़ती रही उधर उसके मुॅह से उत्तेजित स्वर और तेज होते रहे। और थोडी देर में हम दोनो अपनी चरम सीमा पर पहुॅच गये फिर वासना का एक जबरदस्त ज्वार आया और हम दोनो एक साथ बह गये।

मैं उसके ऊपर ही लेटा रह गया। उसने मुझे कसकर पकड रखा था। थोडी देर में मैं मुक्त था। पूजा छुप कर अपने द्यर चली गई।बाद दुपहर जब विशाल खाना खा कर वापस दुकान पर चला गया मैं मम्मा से यह कह कर कि मै अपने दोसत के द्यर जा रहा हूं पूजा के द्यर चला गया। फिर हमने शाम तक एक दूसरे के साथ सेक्स किया इक्कठे नहाए और पूजा ने मेरे लण्ड को अपने मुंह मे डाल कर खूब चूसा और उसको लण्ड को चूसने में ब्हुत ही मजा आ रहा था। शाम को जब मैं जाने लगा तो उसने कहा के आज रात को वह मेरे साथ सोना चाहती है।मैने कहा यह कैसे हो सकता है। उसने कहा कि आज रात को वह नीचे अकेली होगी और उसने कहा कि ११ बजे बाहर आ जाना वह गेट खोल देगी। रात को मैं ११ बजे मैं छोटे गेट से उसको बाहर से ताला लगाकर पूजा के द्यर के बाहर गया तब उसने गेट खोल दिया और मै अन्दर चला गया।पूजा गेट बन्द करके अन्दर आ गई।

मैने पूछा विशाल सो गया क्या ।उसने कहा कि विशाल तो एक द्यंटे से सोया हुआ है।तब मैने पूछा कि वह क्या कर रही थी। उसने कहा " आप से अच्छी तरह चुदने की तैयारी कर रही थी।"

वह मेरे को अपने मम्मी पापा के बैडरूम मे ले गई और आप बाथरूम मे चली गई। थोड़ी देर बाद जब वह बाहर आई उसने छोटी सी नाईटी जो कि बिलकुल पारदरशी थी पहनी हुई थी। उसने नीचे कुछ भी नही पहना हुआ था। उसके मुम्मे और चूत दिख रहे थे। उसने कहा के यह नाईटी मम्मा की है और आज वह मम्मा की तरह ही चुदना चाहती है तब मैने पूछा कि मम्मा की तरह का क्या मतलब है। तो उसने कहा कि एक रात वह बाथरूम जाने के लिए उठी तो उसने देखा कि मम्मी पापा के रूम की लाईट जल रही थी। उसने खिड़की मे से देखा तो मम्मा ने यह ही पहनी हुई थी। उसके बाद उसने २ द्यंटे मम्मा को पापा से चुदते देखा।

थोड़ी देर बाद मैने देखा कि पूजा ने सारे बाल साफ कर हुए थे।उसके बाद हम फिर से एक दूसरे के लिए बिलकुल तैयार थे।उस रात सुबह ५ बजे तक बिलकुल नन्गे एक दूसरे की बाहों मे रहे और इस बीच मैने उसको तीन बार चोदा।उसने मेरे लण्ड को बहुत चूसा। अगले दो दिन भी हम ऐसे ही एक दूसरे की बाहों मे मजे करते रहे। अब हमें जब भी मौका मिलता है हम इसका आनन्द उठाते हैं।

अगर कोई १६ बर्ष से २५ बर्ष तक की लड़की मुझसे कुछ चाहती है सेक्स के बारे मे कुछ जानना चाहती है या अपना ऐसा कोई एक्सपिरीन्स शेयर करना चाहती है तो मुझे नीचे लिखे ई मेल पते पर मेल करे और किसी को कोई खबर नही होगी।

Monday, November 21, 2005

भीष्म प्रतिज्ञा - 1

कपिलवस्तु ने प्रातःकाल स्नान करके अपनी दुशाला गले में ओढ़ी, और नदी के तट से वापस राजमहल की ओर बढ़े तो उन्हें अहसास हुआ कि सामने महल में बैठी रानी कनिका के उन्नत उरोज ठीक उनके चक्षुओं के सामने दृष्टिगोचर हैं। सहसा उन्हें आभास हुआ कि उनका लिङ्ग रक्त से भर के फूल गया है। तब उन्हें ध्यान आया कि ये उचित नहीं, आखिर उन्होंने राजा को वचन दिया था कि वे रानी के मान और उनकी सन्तति के अधिकारों की पूरी रक्षा करेंगे। उस समय उन्हें यह अनुमान न था कि कमसिन रानी चार वर्षों में यौवन की वाटिका में उच्छ्रिङ्खल क्रीडा करने वाली मोहक शोडषी बन जाएँगी, और रानी कनिका की कामुकता अलग अलग रूप में उनके सामने आ के उन्हें सताएगी। बाला की तरह खेल में मग्न रहने वाली इस बालिका का रजस्वला होने के उपरान्त अपने अङ्गों को और अपने सौन्दर्य को निहारना और निखारना स्वाभाविक ही था। प्रारम्भ में कनिका को आभास नहीं हुआ कि उसकी भङ्गिमाएँ कपिलवस्तु पर क्या असर डालती हैं लेकिन जब इसका भान हुआ तो तुरन्त ही वह भी अपनी स्थिति को समझ कर उनसे छेड़ छाड़ करती, लेकिन कपिलवस्तु को यह अहसास नहीं हुआ था कि रानी अब उतनी मासूम नहीं है जितनी प्रतीत होती है।

Sunday, November 20, 2005

सेक्सी सोनिया: एक कहानी

मेरा नाम अनिल है और मैं पहली बार अपने ऐसे किस्से को लिख रहा हूं जो मैं कभी नहीं भुला सकता । मैं आशा करता हूं कि आप इनको समझेंगे और अपने जीवन की घटनाआें के साथ इनकी तुलना कर पायेंगे।

मैं ऐसे ऑफिस में काम करता हूॅ। जहां काम करने वालों में लड़कियों व लड़कों की संख्या बराबर है । अधिकतर लड़कियां मिडल क्लास खानदानों से हैं जिस के कारण "सदाचार" का बहुत असर है चाहे आजकल के मॉर्डन ज़माने में इनका कोई मुल्य नहीं है । परन्तु इन सब लड़कियों में सोनिया बिलकुल अलग है । वह काफी स्लिम है परन्तु उसके मम्मे और चूतड़ लाजवाब हैं । वह ५ फुट ३ इंच ऊंची है और उसकी छाती धरती की खींच को भी झुठला देती है। किस्सा तब शुरू हुआ जब हम दोंनों को किसी मीटिंग के लिये लन्च टाइम पर जाना पड़ा। जैसे आमतौर पर होता है मीटिंग कुछ घंटे चली और हम दोनों को बहुत भूख लग रही थी। कार की तरफ जाते हुये मैंने सोनिया को कहा कि विम्पी या मैकडौनल्ड या के०एफ०सी० जो पास में थे जा कर नाश्ता कर लेतें हैं। सोनिया बरगर नहीं खाना चाहती थी इस लिये हम के०एफ०सी० में घुस गये और क्रिस्पी चिकन ऑर्डर किया। कुछ देर बातें करते वार्तालाप कॉलेज ब्वायफ्रैन्डो इत्यादि की तरफ बढ़ा। सोनिया ने बताया कि उसके कई पुरूष दोस्त हैं पर कोई ऐसा नहीं जिसे ब्वायफ्रैन्ड कहा जा सके।

यह तो हर भारतीय लड़की से समाज की चाह है कि उसके मां बाप उसके लिये एक लड़का ढूंढे और शादी करवा के लड़की को ऐसी ज़िदगी में धकेल दें जिस में उसकी बिलकुल नहीं चलती। खुशी या निरार्शा पति व ससुराल के अत्याचार्र किसी पर उसकी सुनवाई नहीं होती। सोनिया ने मुझे बताया कि उसके पिताजी का देहांत तकरीबन दो वर्ष पहले हो गया था और घर पर सबसे बड़ी है। घरबार उसकी कमाई से ही चलता है। हालंकि अपनी ज़िन्दगी से उसे कोई शिकायत नहीं है पर उसके भाईयों का पढ़ाई छोड़ना और दोस्तों के साथ गुलछर्रे मनाना सबसे बड़ी समस्या है। इस कारण शादी की तरफ तो सोनिया का ध्यान ही नहीं गया। चाहे उसकी आजकल की ज़िन्दगी कोई खास अच्छी नहीं है पर वह शादी से बहुत डरती है क्योंकि क्या पता उसका शौहर उसे प्यार करेगा या उसे बस एक अपनी हवस उतारने का साधन या बच्चे पैदा करने वाली मशीन बना के रख देगा। मैंने सोनिया को २५ वर्ष की आयु में भी समझदार और दूरदर्शी पाया। जैसे जैसे बातें होती रहीं कुछ देर बाद र्वातालाप सेक्स के विषय के आस पास मंडराने लगा। जैसे कि सोनिया ने कहा कि वह ढीले ढाले कपड़े इस लिये पहनती है क्योंकि उसकी चूचियां बड़ी हैं और बसों में सफर करते हुये वह अपनी तरफ ध्यान आर्कशित नहीं करना चाहती।

उसने यह भी कहा कि वह टाइट ब्रा पहनती है क्योंकि जब उसे भाग कर बस पकड़नी होती है तो उसकी चूचियां उछलती हैं। मैंने देखा खि जब सोनिया बातें कर रही थी तो उसने अपने कंधे पीछे कर दिये थे और उसके दुधिया रंग की चूचियां कपड़ों मैं से उभर कर दिख रही थी। उसके निप्पल उभरे हुये थे और जब वह चिकन अपने रसीले अधरों से चूस चूस कर खा रही थी तो मेरा लण्ड अपने आप खड़ा होना शुरू हो गया। मैंने जब उसे बताया तो उसने शरमा कर अपना सिर मेरी तरफ घुमाया। उसकी सुन्दर मुखड़े से साफ ज़ाहिर था कि वह खुश थी कि उसने एक मर्द को उतेजित किया। वह बोली "आप मुझे अच्छे लगते हो परन्तु आप तो शादी शुदा हो। आप अपने जैसा कोई लड़का मेरे लिये क्यों नहीं ढूंढ देते।" खैर बातें करते करते इतना समय बीत गया कि हमंे एहसास हुआ कि शाम हो चुकी है और सोनिया को घर पहुंचना है। चूंूकि हम दोनो का जल्दी अलग होने का मन बिलकुल नहीं था मैने उसे घर छोड़ने का प्रस्ताव दिया। वह कार में आगे की सीट पर बैठ गयी और मैंने गाड़ी चलायी। चलाते हुये मैंने देखा कि वह कनखियों से मेरी लातों के बीच बार बार नज़र मार रही थी और मैं भी उसकी प्यारी चूचियां जो इतनी उभर रहीं थी निहार रहा था। उसके निप्पल भी एैसे तने हुये थे जैसे कि ब्रा और कमीज़ में छेद कर देंगे। वह अपनी लम्बी व सुन्दर जांघों को कभी एक दूसरे के उपर रख रही थी और कभी उतार रही थी और ऐसे करते हुये बहुत सैक्सी लग रही थी। पर उस दिन और कुछ नहीं हुआ पर एक दूसरे का साथ हमें इतना अच्छा लगा कि हमने यह निश्चय किया कि हम ऑफिस के बाहर फिर मिलेंगे।

स्वभाविक था कि सोनिया के इस बात का डर था कि कोई हमें देख न ले इस लिये यह भी तय हुआ कि जब भी हम बाहर निकलेंगे कार में लम्बी सैर के लिये चलेंगे। कुछ दिनों बाद हमने बाहर मिलना शुरू कर दिया। शहर के बाहरी तरफ जा कर हम खूब गप्पें मारते थे। हमारी बातें अपने परिवार अपनी समस्याआें। खास कर अपनी कामनाआें के बारे में थी। सोनिया अभी कुंवारी थी परन्तु उसे सैक्स का बहुत सीमित ज्ञान था। यह स्थिति हर मिडल क्लास घर में पायी जाती है। मैं तो उसके स्तनों के साथ खेलने उसके कोमल अधरों को चूमने नर्म जांघों को सहलाने। उसकी पैंटी में घुसने के लिये बहुत तत्पर था परन्तु सीधापन देख कर मैंने निश्चय किया कि हर काम आहिस्ता होना चाहिये। वैसे भी मैं इस बात में विश्वास रखता हूॅं कि सैक्स और इश्क की पूर्ती तभी होती है जब दोंनो भागीदार बराबरी से शरीक हों। मैं चाहता था कि सोनिया प्यार के बुखार में बहुत गर्म हो। जो न तो औफिस और न ही शहर में हो सकता था कियोंकि समाज की रोकें ऐसा होने नहीं देंगी। बातों के दौरान यह भी बिना बोले स्पष्ट था की जीवन की नइय्या पर इस नाते का कोई असर नहीं होना चाहिये। ना तो मेरी शादीशुदा ज़िदगी पर और ना सोनिया के लड़का ढूंढने के संयोगों पर। सोनिया अपने तरीकों से मेरी तरफ आकर्षण का इज़हार करती थी। जैसे कि मेरे कोट से धागे के कतरे हटाना या मेरी मूंछों से खाने का कतरा साफ करना इत्यादि और मैं भी उसकी पीठ पर हक से हाथ फेर कर या सड़क पार करते हुये उसके प्यारे नितंबों पर हाथ रख कर जैसे उसे पार करवा रहा हूं। जब भी उसके नितंबों को दबाता था तो ऐसा लगता था कि मैं सातवें आसमन में पहुंच गया हूं कसे और गोल और फिर भी इतनी नर्म और मखमली।

हमें मौका अचानक तब मिला जब हमारे अफसर ने बताया कि कम्पनी ने जयपुर में एक नुमायश में हिस्सा लेने का निश्चय किया है और सोनिया हमारे स्टाल को देखेगी जब कि मैं नुमायश के सेमिनार अटैंड करूंगा। पोज़िशन के हिसाब से मेरी बुकिंग एक ५ स्टार होटल में की गर्उ थी और सोनिया को एक पास के होटल में ठहराया ग्या था। नुमायश पास में एक प्लाज़ा में थी जे कि लगभग १ किलोमीटर दूर था। सोनिया इस प्रोग्राम के बारे में सुन कर खुश तो बहुत हुई परन्तु उसे अभी अपनी मम्मी को मनाने की बाधा अभी पार करनी थी। भगवान का शुक्र था कि यह काम हमारे बॉस ने कर दिया। तो प्रोग्राम अनुसार मुझे सोनिया को सुबह अपनी कार में लेना था और हम जयपुर के लिये रवाना होंगे। ५ घंटे का सफर जिसकी हम दोंनो को बेसब्री से इन्तज़ार थी। आखिरकार वह दिन चढ़ा और हम जयपुर के लिये रवाना हुये। सफर तो कोई खास नहीं था बस यही अन्तर था कि लोगों की नज़रों से दूर हमारे हाथों को एक दूसरे को छूने की छूट थी चाहे कपड़ों के उपर से।सोनिया बहुत अच्छे मूड में थी क्यूंकि वह अपने शहर से कम ही निकलती थी। शाम को नुमायश से सीधे हम कार में जयपुर शहर और बाज़ारों की सैर करने निकल गये। सोनिया के पास काफी डिब्बे थे जिन में हमारी कम्पनी के उत्पाद के बारे में पैम्फलेट और एक प्रोजेक्टर था जो हमने कार में रख दिया। बातें करते हुये हम काफी छेड़ छाड़ कर रहे थे। चूंकि हम अपने शहर से दूर थे और हमें कोई जानता नहीं था सोनिया तो बहुत ही मस्त थी।

आपको याद होगा कि मैंने पहले बताया था कि सोनिया ढीले ढाले पहनती है पर उसके पास कुछ ऐसी सलवार कमीज़ें भी थी जो उसकी सुंदर देह को इतना सेक्सी दिखाती थीं की मेरा आपे में रहना कठिन हो रहा था। उस दिन सोनिया ने एक टाइट कमीज़ पहनी हुई थी जिस से उसके मम्मे उभर कर जैसे चिल्ला रहें हो कि इन्हें दबाओ। मैंने सोचा शायद सोनिया मुझ से रोमांस करना चाहती है परन्तु मैं बनती बात बिगाड़ना नहीं चाहता था तो इस बात की पुष्ठी करने के लिये कोई कदम नहीं उठाया। होटल पहुंचने तक मैं सोनिया की सुन्दर छवी के बारे में ही सोचता रहा। उसका गठा बदन बड़े बड़े स्तन उसकी पतली कमर और सीट पर रगड़ते हुये उसके नर्म गोल गोल नितंब। चूंकि नुमायश का सामान गाड़ी में छोड़ा नहीं जा सकता था मैंने कहा क्यों ना इन्हें मेरे कमरे में रख दें। कुछ देर की चुप्पी के बाद सोनिया ने हामी भरी पर कहा कि कमरे में मैं अच्छे पुरूष की तरह बरताव करूं और मौके का फायदा ना लेने की कोशिश करूं।सोनिया होटल की चमक दमक से इतनी मोहित थी कि प्रशंसा के पुल बांधती जा रही थी और बार बार कह रही थी कि उसने एैसी जगह कभी नहीं देखी। कमरे में पहुंच कर मैंने सोनिया को पूछा कि वह क्या पीयेगी। मैं जानता था कि उसे शराब की गंध से सख्त नफरत है इसलिये मैंने उसके लिये "स्क्रूड्राइवर" का ऑर्डर दिया वोडका ह्यजिसमें कोई गंध नहीं होतीहृ और संतरे के जूस का मिष्रण जिससे उसे संतरे का ही स्वाद आये। सोनिया को बहुत प्यास लग रही थी इस लिये उसने पूरा गिलास एक ही बार में गट गट करके पी लिया। बैठे बैठे जैसे कि थकान के कारण सोनिया ने एक बहुत ही सैक्सी अंगड़ाई ली जिससे उसके मम्मे उभर गये जैसे कि दबाने का निमंत्रन दे रहे हों।

मैंने पूछा "क्या तुम्हारा सैक्स का मन नहीं करता"। उसने कहा "करता तो है पर कैसे करूं"। मैंने फिर पूछा "क्या तुम अपनी पुसी या चूत से खेलती नहीं " इस प्रश्न से वह वह पहले तो चौंकी और फिर बोली "ऊपर से सहलाने से कुछ कुछ अच्छा लगता है। मैंने टुथब्रश का हैंडल अन्दर डालने की कोशिश की थी पर दर्द के कारण ऊपर से मल कर रह गई।" मैं इन ख्यालों में खो गया कि सोनिया का चुम्मा लेने में कितना मजा आयेगा। उसके प्यारे प्यारे निप्पल जेा ब्लाउज़ के नीचे साफ खड़े दिख जैसे चुसने और च्यूंटी मारने का निमंत्रन दे रहे हों। उसके कोमल हाथ मेरे लण्ड को सहला रहे हों। उसकी जीभ मेरे लण्ड को प्यार से चाट रही हो। उसके प्यारे होंठ मेरे लण्ड से निकले हुये अम्रत के कतरों को चाट रहें हैं। मेरा मन तो अपने गन्ने को उसके प्यारे मूंह में सरका के अपने र्वीय की वर्षा करने का कर रहा था। मैंने अपनी कल्पना पर लगाम लगाने की बहुत कोशिश की पर कुछ बस में नहीं लग रहा था। मैं सोनिया की चूत की खु़शबू की कल्पना करता जा रहा था। क्या उसकी चूत ने अभ्यास किया कि अपने अन्दर सख्त टुथब्रश को भींच कर पकड़ ले। उसकी चूत के बाल नर्म और रेशमी होंगे क्या उसकी चूत भरपूर फिसलन के साथ गीली होगी। मेरे लण्ड को उसकी म्यान कितनी गर्मी पहूंचायेगी। मैं उसके कान के बूंदों वाली जगह को चाटना चाहता था। उसका मखमली पेट मेरे पेट को सहलाये। जब वह मेरे रसों को पी जाये तो अपने बैठे लण्ड को जैसे ही सोनिया की जांघों पर रखा तो वह तन कर उसकी चूत में फिर दाखिल होने को तैय्यार हो जाये। जब वह झड़ने को तैय्यार हो तो क्या उसका स्वंयबल इतना कम हो जाता है कि उसकी सिसकियां बढ़ जाती हैं और वह अपने प्रेमी को ओर जोर से करने के लिये उतेजित करती है या नहीं। या चुप रहने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों से काटती है। सवालों की सूची का कोई अन्त नहीं था और मेरे लिये एक जनून बन गयी थी।

सोनिया पेशाब करने बाथरूम गयी और जब लौटी तो हैराानगी में बोली "इतना सुन्दर बाथरूम है। इसमें तो टब भी है और शावर भी।" विचारमग्न होते हुये बोली "मेरा मन हमेशा टब में नहाने का करता रहा है। आपको पता है कि मुझे बरसात का मौसम कितना पसंद है। शावर में बिलकुल बरसात की तरह नहा सकती हूं।" मैंने उसके कान में फुसफुसा के कहा "दोनों काम हो सकते हैं।" मैं कलपना कर रहा था उसकी नंगी सैक्सी देह शावर के नीचे उसके मम्मों से टपकता पानी जो टांगों के बीच उसकी चूत से होता हुआ सुन्दर लातों पर छोटी छोटी नदियां बनाता हुआ टब में गिर रहा था। "मैं गरम पानी चला देता हूं। टब भर जाये तो उस में तुम दोनों काम कर सकती हो।" वह जल्दी से मुड़ी उसके स्तन झूले और वह बोली "अनिल क्या कह रहे हो। मेरे पास यहां न तो कपड़े हैं और न ही तौलिया। अच्छा अब डिनर कर लेंऋ फिर मुझे होटल भी जाना है। सारा दिन नुमायश में खड़ी खड़ी मैं बहुत थक गयी हूं।" वह मुस्करायी और मैं कामना के तूफान में कुछ न कह सका। डिनर खा कर हम वपिस कमरे में पहुंचे।

मैंने मज़ाक में सुझाव दिया कि वह वहीं कमरे में क्यों नहीं रूक जाती। सोनिया ने हॅस कर जवाब दिया "अनिल एक जैन्टलमैन की तरह मुझे इन चीज़ों को गाड़ी में पंहुचाने में सहायता करोगे कि नहीं" और कागज़ों के ढेर व डिब्बों की तरफ इशारा किया। हमने दिब्बे उठाये और कमरे से बाहर ले जा कर रखने लगे। सोनिया मेरे पीछे थी इसलिये दरवाज़ा बंद करने के लिये झुकी तो उसके प्यारे गोल गोल नितम्ब मेरे मूंह के सामने झूमें कि अचानक एक चीख मारी और मेरी ओर गिरी। मेरे हाथों में दिब्बे होने के कारण मैंने उसे गिरने से बचाने के लिये अपने आप को आगे किया। सोनिया ने एक हाथ से मेरा कंधे का सहारा लिया और दूसरे हाथ से मेरी बैल्ट के बकल को पकड़ कर मेरे खड़े लण्ड की तरफ धक्का दिया। च्यूंकि मेरा लोड़ा तन तना कर खड़ा था यह पक्का था कि उसके हाथों ने मेरी उतेजता को भंाप लिया होगा। उठते हुये सोनिया का बांया स्तन मेरी दंायी बंाह से रगड़ा। मैं इतना उतेजित हो गया जितना पूरे दिन में न हुआ था। उसने कहा "उफ़ बाल बाल बची। शुक्र है कि आप पास थे।" मैने कहा "कुछ भी तो नहीं था" और अपनी फटी आवाज़ पर काबू करने की कोशिश की। सोनिया एक पल के लिये चौघियाई और उसके प्यारे मुखड़े पर मुस्कराहट की रोशनी चमकने लगी। उसने अपना हाथ मेरी बैल्ट से हटाया और गिरे हुये कागज़ों को बटोरने लगी।

अचनक खड़ी हो कर उसने कहा "कूछ तो था अनिल। आपने मुझे गिरने से तो बचाया ही लेकिन आपके हाथों से एक भी डिब्बा नहीं गिरा। मेरे ख्याल में आपको एक चुम्मी का इनाम मिलना चहिये।" मेरा लण्ड फड़कने लगा। सोनिया ने मेरे होंठों पर चुम्मा लिया। उसका मूंह पूरा खुल नहीं था। उसकी ज़ुबान मूंह के अंदर ही थी पर मूंह पूरा बंद भी नहीं था।उसके होंठों के स्पर्ष से मेरा मूंह खुला और मेरे होंठों ने उसके होंठों को खोला ताकि मेरी ज़ुबान उनको चाट सके। मेरा शरीर उसके शरीर से चुम्बक की तरह चिपका हुआ था। मेरी बांहें उसके पीछे थी और उसके मुलायम नितंबों को सहला रहीं थी। उसकी बांहें मेरे गले के उपर लिपटी थी और वह मेरे साथ चिपकी हुयी थी। उसकी प्यारी देह मेरे उतेजित लण्ड के साथ रगड़ रही थी। सोनिया ने वापिस उसी उतेजना के साथ मुझे चूमा और उसकी ज़ुबान ने मेरे मुंह के अन्दर ताांडव नृत्य शुरू किया। यह पूर्ण शरीर का चुम्मा था जिसमें भविष्य में कामुकता का वादा था। जो सम्भोग से भी कहीं अधिक उतेजना पैदा कर गय था। मुझे एहसास था कि सोनिया मुझ से अपनी गीली चूत में अपना लण्ड डालने की मंाग करेगी। जेा अन्दर बाहर तब तक आरी की तरह चलेगा जब तक हम दोंनों प्रबल उतेजना की बाढ़ में बह जायेंगे। वह मुझे अपनी चूत को ज़ुबान से इतना उतेजित करने को कहेगी कि उससे खुशी के आंसु बहने शुरू हो जायें। वह किसी भी कीमत पर मेरे लोड़े को चूसने की अनुमती मांगेगी और फिर इतना चाटेगी और चूसेगी कि मेरे लण्ड से वीर्य की पिचकारियंा उसके मुखड़े पर वर्षा करेंगी। और उससे अपनी नर्म चमड़ी पर मालिश करेगी कि कामुकता में मेरा बीज और गंध उसमें समा जायें। मुझे उन सब सवालों का जवाब पता था।

मुझे उसके नशीले होंठों कामुक्त निप्पलों़़ सैक्सी नाभी मीठी योर्नी सब का स्वाद पता था। मुझे उसकी पीठ़़ उसके नितम्बों उसके हाथ मेरे ट्टटों पर और मेरा लण्ड पर उसकी कोमल चूत की पकड़। सब का र्स्पश पता था। उसकी सिस्कियां जो संगीत की तरह थी उन पर नाचना आता था। ओह कितना उतेजित करने वाला मेरे लण्ड को चूसना उसकी ज़ुबान का मेरे लण्ड के टोपे पर झूमना उसके मूंह की नर्मी जो मेरे लण्ड को और भी उतेजित कर रही थी कि मैं आपे से बाहर हो कर अपने वीर्य की वर्षा उसके स्तनों हाथाे़ं बांहों योनि पर करने से रुक नहीं पाया। इन सब चीज़ों का ज्ञान मुझे उन पलों में आया जब सोनिया और मैं कस कर आलिंगन कर रहे थे और कामुक्ता के बुखार में विर्सजित हो कर अपनी अन्दर की भावनाआें को प्रकट कर रहे थे। मैंने अपने हाथों को उसके नितम्बों से सरका कर उसके उभरे हुये स्तनों पर रख दिया। हम अचनक अलग हुये और आंखे खोली। सोनिया ने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे कार की लाइट में एक हिरण चौंकता है और सिर हिला कर बोली "हम ऐसे नहीं कर सकते"। मैंने बुझे स्वर में कहा "सोनिया हम तैय्यार हैं। हमें अब अगला कदम लेना है।" वोह चीखी "नहीं। हम चुदाई नहीं कर सकते। हमारे सम्बंध दफ्तर के काम के कारण हैं। हम इक्ठ्ठे काम करते हैं।" "ओह सोनिया। तुमने वही अनुभव किया जो मैंने अनुभव किया। मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं सोनिया बिलकुल वैसे ही जैसे तुम्हारी चूत मेरे लण्ड की प्यासी है।" मैं बहुत उतेजित था और मेरी सांस भी फूल रही थी। किसी तरह शब्द मेरे मूंह से निकले "मैं तुम्हारे कपड़े उतारूंगा और तुम मेरे। तुम मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेने को तत्पर हो। तुम मेरे बड़े लोड़े को अपने मूंह में ले कर इसका स्वाद लेने का इन्तज़ार नहीं कर सकती। मुझे पता है कि अभी जो चुम्मा लिया था वह चुदाई से कम नहीं था। हमने चुदाई तो कर ली है बस अब फिर से करनी है।" उसने सिर हिला कर कहा "नहीं।" "तुम मेरी जान हो और मैं तुम्हारा ग्ा़ुलाम।" वह चुपचाप मेरी तरफ देखती रहै।

"सोनिया"

मैं उसकी तरफ बढ़ा "यह हमारे बस में नहीं है। और कोई रास्ता भी नहीं है। मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है और तुम्हें मेरी। जब हम कर नहीं लेते तुम मेरे बारे में सोचती रहोगी। तुम करना चाहती हो।" मैं सोनिया को अपनी बांहों में लेने के लिये और उसका चुम्म लेने के लिये आगे बढ़ा "तुम्हें यह चहिये। तुम्हें दुनिया में इस पल इससे ज़्यादा और कुछ नहीं चाहिये।" वह झटक कर अचानक अलग हो गयी और कस के मेरे गाल पर एक थप्पड़ मारा। "नहीं" वह चिल्लाई। "मैं ऑफिस का तुम्हारा एक किस्सा नहीं बनना चाहती। मुझे तुम्हारा लौडा नहीं चाहिये।" अब वह गुस्से से लाल हो गई थी। "मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है। एक दिन मेरा भी शौहर होगा जे मेरी चूत की चुदाई करेगा। मैं उसका इन्तज़ार कर सकती हूं। जब वोह चाहेगा मैं उसका लण्ड भी चूसूंगी। और तुम्हारी बीवी भी तो है। तुम एक अय्याश हरामज़ादे हो।"

मैं उसके गुस्से से दंग रह गया। क्या मैंने उसकी उतेजित अवस्था को गलत समझा था। क्या उसका पैंट के ऊपर से लण्ड का छूना उसकी मुस्कानाे़ं उसकी चुलबुलेपन को गलत पढ़ा था। क्या मैं इतना गया गुज़रा हूंऋ वह ऐसे झूठ क्यों बोल रही हैऋ क्या मैं पागल हो गया हूंऋ सोनिया कमरे में आगे पीछे घूमने लगी और वैसे ही जोर जोर से बोलने लगी " और यह प्यार व्यार तकदीर सच्ची मोहब्बत। यह सब जो तुम कह रहे हो कहीं नहीं मिलते। मेरे पास प्यार है और मुझे यह किसी साथ में काम करने वाले से एक अशलील किस्से के रूप में नहीं चाहिये। मेरे से ऐसी बातें न करो।" मेरे दिल में तूफान चल रहा था। मेरा सिर चक्कर खा रहा था और मैं बाथरूम की तरफ भागा। लम्बी सांसे ले कर और मुॅह पर पानी फेंक कर मैंने अपनी दिल की तेज़ रफ्तार को कम किया। फिर मैं वपिस रूम में आ कर बैड पर लेट गया। एक टक छत को देखता रहा। मेरा दिमाग उबल रहा था। मैंने अपने दफ्तर का सबसे अच्छा दोस्त तो खो ही दिया था। और यदि वह इस बारे में हमारे मैनेजर से कह देती है तो शायद नौकरी भी। और बात अगर घर तक पहुंच जाती है तो शादी का भी क्या कहना। लगता है कि मैं पागल हो रहा हूं। मैंने अपना सर तकिये पर रखा और रोने वाला हो गया। मैंने अपने आप से कहा "अनिल इस बार तो अपनी चुदा ली है।" शायद मेरी आंख कुछ पलों के लिये लग गयी क्योंकि जब होश आया तो मेरी गालें गीली थीं। किसी ने पुकारा "अनिल"।

मैंने अपनी गालें पोंछी और बोला "क्या"।

"अनिल मेरी तरफ देख सकते हो"

मैंने सिर हिला कर नहीं का इशारा किया। मेरे कंधों पर हाथ रख कर बोली "आई एम सॉरी अनिल। मैंने सब गलत बोला था। मेरे पास मेरा कुंवारापन है और तुम्हारे पास तुम्हारी बीवी और"

"सॉरी" मैंने कहा।

"नहीं सॉरी तो मुझे कहना चाहिये। मैं तुमसे प्यार करना चाहती हूं। मैं तुमसे लिपटना चाहती हूं। तभी तो जब से मुलाकात हुयी है मैं तुम्हारे से फ्र्लट करती रही हूं। मैं तुम्हें इस लिये एक दोस्त की तरह खोना नहीं चाहती कि हम प्रेमी बन गये हैं।" "यह तो सबसे बड़ा झूठ है। प्रेमी दोस्त भी तो होते हैं" मैंने कहा। मैंने सिर घुमाया परन्तु अपनी नज़रें ज़मीन पर टिकाये रखीं। "अनिल मैं सच में सॉरी हूं" उसने कहा। "पर मैं इस से डरती हूं। तुम्हारा मनोभाव मुझे डराता है। मेरा तुम्हारे लिये मनोभाव भी मुझे डराता है। मेरा तुमसे प्यार करने का इतना मन कर रहा है कि मैं ख़ुद डर रही हूं। अनिल अगर तुम मेरे से प्यार करना चाहते हो तो मैं भी तैय्यार हूं। बस मुझे यह सिखाओ कि मैं इससे डरूं ना।" "क्या मैं तुम पर विश्वस कर सकता हूं" मैंने अपनी सुरक्षा के लिये कहा। "तुम भी मेरे जितने डरे हुये हो।" सोनिया ने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे कुरसी पर वापिस बिठाया और मेरे गाल पर चुम्मा लिया। फिर हल्के से मेरे कान में फुसफसाई "अनिल आई लव यू।" "आई लव यू सोनिया" मैंने कहा। हमने एक दूसरे को चूमना शुरू किया। यह चुम्मियां गहरी और देर की थी जबकि पहले की उतावलेपन की थी। यह मदभरी थीं जबकि पहले की कामनावस्त थीं। हमारी जीभें आपस में नाच रहीं थी। जैसे समुद्र के तट पर रेता ज्वार भाटे से खिसकती है। जैसे हवा में वृक्ष के पते लहराते हैं। सोनिया कुर्सी के पीछे से आगे आई और मेरी बांहों के सहारे मेरी गोद में बैठ गयी।

हमने अपनी सांसे खींची और फिर से चुम्मियां लेनी शुरू कर दीं होठों को चिपका कर। मैंने अपने जूतों को झटके से उतारा और उसकी एक सैंडल उतारी। मुझे दूसरी सैंडल गिरने की आवाज़ आई और एहसास किया कि सोनिया मेरी बैल्ट खींच रही है। वह मुस्कराई मेरी बैल्ट खोली और पेंट का उपर का बटन खोल दिया। मैंने उसकी पीठ पर हाथ ले जा कर एक हाथ से कमीज़ के हुक खोलने शुरू किये और दूसरे हाथ से उसके गोल गोल रसभरे मम्मों पर रख कर उन्हें परखने लगा। सोनिया ने अपना हाथ मेरी पैंट में घुसा कर मेरे लिंग को सहलाना शुरू कर दिया। उसकी हाथ की गर्मी से मेरा लन्ड तनना शुरू हो गया। "ऊॅह कितना बड़ा है" उसने कहा हैरानगी की एक्टिन्ग करके। अपना मूंह को गोल आकार का कर के अपने होंठों से चटकारे मार के वह मुस्कराई। ज़ुबान को अपने होंठों पर बड़े सैक्सी तरह से फेरा। मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखे और आहिस्ता से उसकी कमीज़ को ब्रा में कसे मम्मों के उपर से खिस्काई। मैंने उसे अपने सीने से चिपका कर ब्रा के हुक खोले। ब्रा उतारने के लिये वह पीछे हुई और अपनी बांहों को उपर उठाया। ब्रा उसके उभरे मुलायम मम्मों पर अटकी हुयी थी। "उतारो" उसने मुझे कहा। मैंने उसकी बांहों के उपर से स्ट्रैपों को खिसकाया और ब्रा साथ में उतर आई। उसके मम्मे बहुत सुन्दर भरे नर्म पर मज़बूत थे। मेरी आंखों के सामने सुन्दरतम गोले झूम रहे थे और उन गोलों पर प्यारे प्यारे निप्पल खड़े थे और निप्पलों के आस पास हल्के भूरे गुलाबी उभरे हुये स्तन परीवेश जैसे कि चूसने के लिये उतावले हो रहें हों। मैंने सोनिया की ठोड़ी को चूमा फिर उसकी गरदन को चाटा और हल्के से उसके निप्पलों का चुम्मा लिया। पहले बांये वाले को फिर दांये को। उसने मेरी कमीज़ की बटनों की तरफ हाथ बढ़ाया पर मैंने उसे रोका और कहा "पहले ऐसे ही मज़ा लेते हैं। हमें समय की कोई कमी नहीं है।" मैंने उसे खड़ा हो कर घूमने के लिये कहा जिस से उसकी पीठ मेरी तरफ हो गयी। फिर नटखट तरीके से उसकी सलवार के कपड़े को नितम्बों के बीच फसा कर ऊपर से नीचे तक सहलाया। "ऐ" वह बोली और जब मैंने उसे अपनी तरफ खींचा तो अचानक मेरी गोद में बैठ गयी। मैंने उसके कूल्हों को रास्ता देते हुये इस तरह से बैठाया कि मेरा लन्ड उसके नर्म नितम्बों के बीच फस गया। वह समझ गयी और मुड़ कर मेरा एक जबरदस्त चुम्मा लिया।

मेरे हाथ उसके मम्मों पर गये और मैंने उनसे खेलना शुरू किया। मैंने उन प्यारे प्यारे मम्मों को मला गुदगुदी की मालिश की दबाया और निप्पलों को अंगुठे व अगुली के बीच चुटकी काटी। मम्मों को उठाया और नर्म मुलायम पेट पर हाथ फेरा। उसे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था और इसका सबूत था उसकी सिस्कियां और उसका निढाल तरीके से लेटना। अपने चूतड़ों का मेरे लन्ड पर रगड़ना। मैं भी उसकी प्यारी देह को छाती से जांघों तक और कंधे से हथेलियों तक सहला रहा था पर मैंने जान बूझ कर उसकी लातों के बीच हाथ नहीं लगाया। मैंने फैसला कर लिया था कि मैं सोनिया की चूत को तब तक नहीं हाथ लगाऊंगा जब तक वह इसकी विनती नहीं करती या कम से कम जब तक उसका पानी नहीं छूटता। सोनिया के प्यारे मम्मों के साथ खेलने के बाद मैंने उसे घूम कर बैठने को कहा। उसने अपनी लातें चौड़ी की और मेरी लातों को बीच में ले कर वापिस मेरी गोद में बैठ गयी। उसके कूल्हे मेरी जांघों पर आराम कर रहे थे। उसने जल्दी से मेरी कमीज़ के बटन कोलने शुरू किये और मेरे कंधों से खिसका कर उतार दी। सोनिया ने मेरी छाती पर हाथ फेरने शुरू किये और मेरे निप्पलों की च्यूंटी काटी। हंसते हुये बोली "जो तुमने किया वही तो कर रही हूं"। मेरी छाती और पेट की मालिश करते हुये मेरी पैन्ट के ऊपर से मेरे पत्थर जैसे सख्त लन्ड को बार बार छू रही थी। साथ में बीच बीच में मेरी गर्दन और कनपटी की चुम्मियां ले रही थी। मैंने अपनी बंाहें उसके पीछे ले जा कर उसके नर्म नर्म नितम्बों को दबाया जैसे आड़ूआें को नर्म कर रहा हूं। मैंने उसके कूल्हों के बीच अपना हाथ किसकाया और दरार को ऊपर नीचे सहलाने लगा। वह जैसे नशे में कांपने लगी और मेरे कभी दांयें कभी बांये निप्पल को चूसने व हल्के से काटने लगी।

उसने मेरा ज़िप नीचे खिसकाया और मेरे लन्ड को अन्डरवीयर के ऊपर से सहलाना शुरू किया। मैंने उसकी पीठ के सहारे उसे उठाया और उसके मम्मों को एक भूखे आदमी की तरह चूसने लगा। बीच बीच में निप्पलों को चाटता था या प्यार से दांतों के बीच काटता था। मैैं हस रहा था और वह सी सी की आवाज़ें कर रही थी। अचनक मैंने जब जोर से मम्मों को मसला तो बोली "हाय इतनी जोर से नहीं। गुदगुदी होती है।" मैं एक सेकन्ड के लिये रूका और फिर से उसके मम्मों और निप्पलों को ज़ुबान से छेड़ छाड़ करने लगा। "हॉ इनको प्यार से चूसो। क्या तुम दोनें निप्पलों को मूंह में ले सकते होऋ" यह एक ऐसा चैलेन्ज था जो मैं कैसे जाने देता। मैने उसके दोनें बुब्बों को हाथ में लिया और दोनों निप्पलों को साथ साथ चूसना शुरू कर दिया। वह इतनी उतेजित हो गयी कि सी सी करके उसकी चूत मेरे लन्ड पर धक्के लगने लगी। "क्या तुम्हारे निप्पलों का तुम्हारी चूत के साथ सीधा कन्नेक्शन है" मैंने पूछा। "हां मेरी जान" उसने कहा "पर इस बात पर निर्भर करता है कि निप्पल के साथ प्यार कैसे किया जाता है। तुम्हारी ज़ुबान ते बिजली के करंट की तरह मेरे मम्मे और पुसी में खुजली मचा रही है। प्लीज़ मुझे चूत शब्द से शर्म आती है। इसे पुसी कहिये ना।" मैं अचानक रूक गया। हम दोनों की सांसे फूली हुई थी। समय आ गया था।

चुपचाप हम उठे और मैंने उसकी सलवार को नीचे खींचा। मेरे हाथ उसके गोल स्लिम चूतड़ों पर गये और मैंने उनकी नर्मी का मज़ा लिया। मैने उसे कमर से झुकाया और पहले दांयी गोलाई को चूमा और फिर बांयी को। मेरे हाथ उसकी लटकती चुचियों के साथ खेल रहे थे। उस समय में उसने मेरी पैन्ट उतार दी। फिर मेरे अन्डरवीयर के ऊपर से मेरे लन्ड पर झपटा मारा और ऐसे पकड़ा जैसे उसे इससे अत्यंत मजा मिल रहा हो। पर ज़्यादा देर न कर के उसने मेरे अन्डरवीयर को नीचे करके उतार दिया। मेरा लन्ड बाहर निकल कर तन्ना कर उसकी तरफ फ़ूंकार मारने लगा। मैं सीधा खड़ा हो गया। सोनिया ने ऊपर देखा और लन्ड को लटकते देख कर उसके सिरे को अंगुली से छूआ और र्वीय के कतरे को अंगुली पर ले कर उसे ज़ुबान से चखा। "म्म्म्म्म्म्म। स्वाद भी अच्छा है। कितना मोटा और लम्बा लन्ड है" उसने कहा। सोनिया घुटनों के बल मेरी लातों के बीच बैठ गयी मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और बोली "मैं इसको इतना प्यार करूंगी कि आप को जन्नत का मज़ा आ जायेगा। इतना टेस्टी है कि मैं लगातार इसे चूसती रहूंगी।" उसने मेरे लन्ड को नीचे से ऊपर तक अपनी ज़ुबान के साथ चाटा फिर अपनी ज़ुबान को टोपे पर घुमाया। फिर उसे अपने मूंह में ले कर अपने सुन्दर होंठों से लपेट लिया। उसके गीले मूंह का र्स्पश सचमुच जन्नत के बराबर था। सोनिया ने अपने हाथ मेरे चूतड़ों पर रख कर उन्हें दबाया और मेरे नितम्बों को स्थिर रख कर अपना मूंह मेरे लन्ड पर ऊपर नीचे खिसकाने लगी।

"अनिल मुझे तुम्हारे लन्ड के सिरे से र्वीय का स्वाद आ रहा है" वह बोली मेरे लन्ड को चाटते हुये। मैंने उसके बाल सहलाते हुये कहा "सोनिया डार्लिंग कैसा लग रहा है।" मुझे तुम्हारा लन्ड बहुत प्यारा लग रहा है। उसका स्वाद और स्पर्श अन्दर बाहर जाते हुये बहुत सेक्सी लग रहा है। यह मुझे बहुत उतेजित कर रहा है।" मेरी पुसी बिलकुल गीली हो गयी है।" सोनिया ने मेरा लन्ड अपने मीठे होंठों के बीच फिसलाया। वही अधर जिन्हें मैं कुछ देर पहले चूम रहा था। जैसे ही उसका मूंह मेरे लन्ड पर ऊपर नीचे होना शुरू हुआ मैंने उसके मूंह को चोदना शुरू कर दिया। उसने प्रोत्सहन देने कए लिये मेरे चूतड़ों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। मैंने और गहरे धक्के लगाने शुरू किये और मुझे लगा जैसे मेरा लन्ड उसके गले तक पहुंच रहा है। वह उतेजना में मेरा मीट खा रही थी और मेरी जांघों और अन्डकोशों को सहला रही थी। "मैं इन अन्डों को खा जाउंगी। इनको चूसने से मेरी पुसी की खुजली और भी बढ़ती है।" सोनिया को सचमुच लन्ड चूसना बहुत अच्छी तरह आता था और कुछ ही देर में मेरी तोप शूट करने को तय्यार थी। "ओहहहह मैं छूटने वाला हूं। मेरा लन्ड पिचकारी चलाने के लिये तैय्यार है।"

"म्म्म्म्म्म्म्फ्फ"

सोनिया ने अपने होंठों और ज़ुबान की क्रिया तेज़ कर दी। एक हाथ मेरे अन्डों के साथ खेल रहा था और दूसरा मेरे चूतड़ों को खींच रहा था जब मेरा लौड़ा उसके मूंह में पूरा धसा हुआ था।

"ओह सोनिया। हां। मेरा निकल रहा।।।।। बहुत ज़्यादा निकलेगा।।।।।।।।"

मेरी तोप चली। मैंने र्वीय की पिचकारी उसके मूंह और गले में चलायी। उसने मेरे गन्ने को और चूसा और मेरे सारे रस को पीती रही। एक हाथ से मेरे अन्डों को सहलाती रही जैसे उनको निचोड़ कर खाली कर रही हो। जैसे वह चूसती जा रही थी मेरा लन्ड सैन्सिटिव हो गया परन्तु उसके गर्म और गीले मूंह में तन्नाया रहा। मैं आराम करने को पीछे हुआ अपने माथे से पसीना पौंछा। "सोनिया तुमने तो सचमुच जन्नत दिखा दी है। मैं हैरान हूं कि तुम इतनी अच्छी कॉक सकर हो। मैं तुम्हारी बड़ाई कर रहा हूं। तुम्हारा मूंह इतना काबिल होगा यह तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था।" उसने गन्ने को और टोपे को फिर चाटा मुझे देख कर मुस्कराई और बोली "मैंने पहली बार किया है। अनिल अब मेरी पुसी का कुछ करो। तुम्हारे लिये बिलकुल गीली है।" मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया और चुम्मियां लेते हुये उसके होंठों से लातों के बीच उसके सैक्सीपन का स्वाद लेते हुये पहुंचा। मुझे उसकी उतेजना की खुशबू आ रही थी। जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी चुत के उभार पर रखे तो वह बोली "यह क्या कर रहे हो। पुसी तो गन्दी जगह होती है।"

मैंने कहा "नहीं। यह तो स्वर्ग जैसी है। देखो मेरे लिये कितनी गीली है। मैं इसका जितना रस पीना चाहूं पियूगा।" मैंने पुसी को चाट कर कहा "तुम्हारी चूत का शहद कितना मीठा है।" सोनिया कराही मेरा लन्ड पकड़ा बिना मेरे मूंह को हटाये घूमी और लन्ड को फिर मूंह में ले लिया। उसकी झांटों के बीच चूत के गुलाबी सूजे होंठ साफ दिख रहे थे। मैं उन्हें निहार कर और उतेजित हो रहा था। मैंने फिर चाटना शुरू कर दिया। उसकी सिस्कियंा और तेज़ हो गयी। मैंने उसकी लातों को उठा कर उसके कंधे की तरफ मोड़ा। उसकी चूत की पंखुड़ियां गुलाब के फूल की तरह फैल गयी जैसे मुझे अमृतपान के लिये आमन्त्रित कर रही हों। मैंने भी निश्चय कर लिया कि मैं सोनिया को उस र्चम सीमा तक पहुंचाउंगा जिसे उसने कभी पहले पार नहीं किया हो। मैंने उसकी चूत की दरार के दोनों तरफ अपने अंगूठे रखे और पंखुड़ियों को खोला। जैसे मैं अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ा तो मैंने देखा कि सोनिया मेरे उ ेशय के लिये बिलकुल तैय्यार थी। गीलपन उसके शहद छोड़ने वाले सुराख से निकल कर सुराख के नीचे इकठ्ठा हो गया था। उसकी उतेजना की गंध मेरे नाक तक पहंुची और मैं अधिक इंतज़ार नहीं कर पा रहा था। मैंने अपना मूंह उसकी चूत पर रखा और उसके प्यार के रस को पीना शुरू कर दिया। मैंने उसकी पुसी के पट खोल कर अपनी ज़ुबान उस की चूत में घुसा दी। पुसी बहुत रसभरी थी।

"वाह क्या स््वाद है" मैंने कहा। मेरी टिप्पनी कोई इतनी खास नहीं थी पर मैं र्शत लगाने को तैय्यार हूं कि कोई एक खूबसूरत लड़की का स्वाद लेते हुये कोई मज़ेदार बात नहीं कर सकता खासकर जब वही लड़की अपनी प्रतिभाशाली ज़ुबान और होंठ आप के लन्ड पर चला रही हो। उसने अचानक मेरे लन्ड को छोड़ा और छटपटाने लगी। उसका जिस्म ऊपर नीचे जाने लगा जिस से मेरी ज़ुबान उसकी क्लिटोरी पर रगड़ने लगी। उसकी यह हरकत और भी तेज़ होने लगी और मेरी ज़ुबान उसकी रसभरी चूत में फिसल कर जाने लगी। अब तक चूत उतेजना से और भी चौड़ी हो गयी थी। "मेरी पुसी को टंग फक करो। अपनी ज़ुबान अन्दर बाहर डालो" उसने कहा। मैंने उसे निराश नहीं किया। मैंने उसकी प्यारी लातों को और पीछे किया कि वह अब उसके कंधों तक पहुंच गयी थी। फिर उसके हाथों को पकड़ कर उसके चूतड़ों पर लाया और कहा "अपनी चूत को मेरी ज़ुबान के लिये खोले।" उसने वही किया। मैंने अपने हाथों में उसकी चूचियां पकड़ी और उसके निप्पलों को चुटकी मार कर उसकी उभरी उतेजित चूत में अपनी ज़ुबान को आरी की तरह चलाना शुरू कर दिया। "ऊऊऊऊऊ हाय मां उफ। और करो। खा जाओ मेरी पुसी को। मेरै पुसी बस आपके प्यार के लिये बनी है। ज़ालिम और मत तड़पाओ। और चूसो। टंग फक करो।"

वह बिलकुल झड़ने की अवस्था में थी और जोर जेर से ऊपर धक्के लगा रही थी। मैंने अपनी ज़ुबान उसकी चूत को नीचे से ऊपर तक फिराया। जैसे मैं ऊपर की तरफ पंहुचा मेरी ज़ुबान ने उसकी क्लिटोरी जो तन के खड़ी थीेंें को सहलाया तो उसने बहुत जोर से हाय की और उसकी देह एकदम ऊपर उठी। मैंने अपनी ज़ुबान उसकी क्लिटोरी पर रख कर अपना सिर जोर से हिलाया। फिर मैंने क्लिटोरी को होंठों के बीच भीच कर अपनी एक अॅगुली उसकी चूत में घुसाई। धीरे धीरे अंगुली को अन्दर बाहर करने लगा ताकि और भी किसी चीज़ के लिये तैय्यार कर सकूं। उसने उतेजित आवज़ में कहा "हां अनिल मेरी पुसी को फिन्गर फक करो। मेरी पुसी लगतार झड़ना चाहती है।" मैंने सोनिया की ज़ायकेदार क्लिटोरी को चाटता रहा उसके स्वाद भरे चूत रस को पीता रहा और अपनी अगुली को उसकी चूत में चलाता रहा। फिर मैंने उसके गर्म गर्म दरार में एक और अंगुली घुसाई और दो अंगुलियों से फक करना शरू कर दिया। सोनिया जोर से कहराई और अपने मम्मों को दबाया अपने निप्पलों को खींचों और अपने दूध भरे बुब्बों को मसलने लगी। उसकी देह ने झटके खाने शुरू कर दिये और साथ में अपनी चूत को मेरी ज़ुबान पर रगड़ने लगी। सोनिया ने अपनी लातें मेरे सिर पर लपेट लीं और कहरा कर बोली " मेरी पुसी और बदन को आग लगी है। ओह अनिल। हाय अनिल। चूसो। मेरी पुसी चूसो। मेरी गीली पुसी को और चूसो। मेरी चूत को खा जाओ।" उसके चूतड़ झटके खाने लगे और अपनी चूत को मेरे दांतों के साथ रगड़ने लगी। उसने उतेजन में बोला "मेरे जानूें मेरी चूत और चूसो। ओह हां। बहुत अच्छा ल्ग रहा है। और अंगुलियां डालो।" मैंने एक और अंगुली डाली और तीन अंगुलियों से चोदना चालू कर दिया।

"चाटते रहो। मुझे कुछ हो रहा है। एक तूफान पैदा हो रहा है। मैं आई। मैं आई। हाय रब्बों कितना मज़ा आ रहा है। मेरा निकल रहा है। चाटो। पुसी को चूसो। चूसते रहो। मेरी चूत में आग रग रही है। इसे बुझओ। ओह अनिल अपनी अंगुलियां और तेज़ चलाओ। दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ दबाओ। उउउह । और। और।" सोनिया के शरीर ने एक जबरदस्त झटका लिया और वह निढाल हो गयी। मैं उसकी चूत चाटता रहा और उसके स्वादिश्ट रसों को पीता रहा। वह धीरे धीरे झटके लेती रही और मेरे नाम को पुकारती रही। इतने समय उसकी लाता नेें मेरे सिर को अपनी कैद में रखा और मेरा मूंह उसकी चूत के साथ चिपका रहा। जब उसे वापिस होश आया तो बोली "अनिलें मेरे जानू। तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी। मुझे पता है कि तुम चूसते ही नहीं चोदते भी बहुत अच्छी तरह से।" मेरा लन्ड फुन्कारे मार रहा था। जिस शहद भरी दरार को मैं इतने प्यार से चाट रहा था अब वह उसमें घुसना चाहता था। मैंने कहा "यह तो केवल शुरूआत है।" "क्या तुम अपना गर्म गर्म लोड़ा मेरी पुसी में डालोगे। मेरी पुसी तुम्हारे लिये जूस से भरी हुयी है। जल्दी से अपना लोड़ा मेरी पुसी में डालो" उसने मांग की। मैं उठा और सोनिया को खड़ा कर के उसे चूमना शुरू किया। अपने शरीरों को रगड़ रगड़ कर उतेजना की एक और सीमा पार की। फिर मैंने उसके हल्के शरीर को उठाया और सीधे करके बिस्तर पर लिटा दिया।

"क्या करने की तैय्यारी हो रही है" उसने मुस्कराते हुये पूछा।

"आराम से लेटो सोनिया। अब फक करने का समय आ गया है। मैं अब तुम्हें चोदूंगा।" सोनिया ने जल्दी से हां की और अपनी गर्म गर्म छोटी देह को उछालने लगी। उसकी चूत कारोड़ों की लग रही थी। "अनिल मैं तुम्हारे इस बड़े लौड़े से चुदवाने की और इन्तज़ार नहीं कर सकती।" वह मुस्कराई और बोली "आहिस्ता शुरू करना। मेरी पुसी अभी कोरी तक कोरी है। इसे पहले चौड़ी करो। इसे अच्छी तरह गीली कर दो ताकि जब तुम अपना घोड़े का लन्ड इसमें डालोगे तो यह फट ना जाये।" उसने अपने छोटे छोटे हाथों में मेरा लन्ड पकड़ा और जैसे मैं उसकी तरफ झुका उस ने मेरे लन्ड को अपनी चूत की दिशा में लगाया। कराह कर बोली "आहिस्ता आहिस्ता। मेरी चूत को तुम्हारेे बड़े डन्डे की आदत पड़ने दो। बाद में जितनी जेर से चोदना हो चोदना।" मेरे लन्ड के सिरे ने उसकी गर्म और गीली सुरंग को छुआ। मेरा तो मन कर रहा था कि एक ही धक्के में अपने ७ इन्च अन्दर घुसा दूं पर उसके हाथ ने याद दिलाया कि उसने आहिस्ता करने की मांग की थी। जब हमारे लिंग छुये तो वह कराही। जैसे मैंने अपना लन्ड उसकी गर्म चूत में थोड़ा डाला उसने अपने चूतड़ उछाले और मेरा लौड़ा उसकी मक्खन सी चूत में अन्दर तक घुस गया हमारी झंाटे एक दूसरे में मिल गयी और मेरा अन्डकोश उसके चूतड़ों के साथ टकराया। उसकी टाइट चूत ने मेरे लन्ड को अपने में भींच लिया और इलस्टिक की तरह चौड़ी हो गयी।

मैंने आहिस्ता आहिस्ता वपिस धक्के लगाने शुरू किये। हर धक्के के साथ सोनिया ने वापिस जवाबी धक्का दिया। कुछ देर में जब उसकी पुसी को मेरे लन्ड की आदत हो गयी तो वह और जोर के धक्के वापिस देने शुरू किये जिस से मेरा लन्ड और अन्दर घुसने लगा। मेरे टट्टे उसके चूतड़ों के साथ और जोर से टकराने लगे। वह कराही "मुझे और जोर से फक करो। मेरी पुसी तुम्हारे लन्ड से मरवाना चाहती है।" उसने अपनी बांहों का हार मेरे गले में डाल कर कहा " अनिल मुझे जानवर की तरह चोदो।" मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ कर और तेज़ और जोरदार धक्के लगाये। "मुझे फक करो अनिल। मुझे जी भर कर चोदो" वह बार बार कह रही थी। आखिर मेरे से रहा नहीं गया और मैं चिल्लाया "सोनिया मैं झड़ रहा हूं।" उसने मुस्करा कर कहा "हां मेरी जान झड़ाे़ पर मेरी पुसी में नहीं। अपना लोड़ा निकालो। मैं तुम्हारा रस पीना चाहती हूं।"

मेरी बास रचना : एक कहानी

सबसे पहले मैं अपनी बॉस का धन्यवाद करना चाहूंगा जिसकी बदौलत मैं आज मस्ती के उस मुकाम पर पहुंचा हूं जहां मेरी वासना का ज्वार हर लहर के साथ टूट कर नहीं बिखरता। हर एक लहर अगली लहर को तब तक बढाती है जब तक कि आखिरी मंजिल पर पहुंच कर एक जबरदस्त उफान के साथ मेरे प्यार का लावा असीम आनन्द देता हुआ मेरे साथी को अपने साथ बहा ले जाता है।

बात उस समय की है जब मैं एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में काम कर रहा था। मिस रचना मेरी बॉस थी। उम्र रही होगी करीब २८ साल की। लम्बी करीब ५'८" और सारी गोलाईयां एकदम परफेक्ट। अफवाह थी कि वो मिस इन्डिया में भी भाग ले चुकी थी। पर गजब की सख्ती बरतती थी वो हम सब के साथ। किसी की भी हिम्मत नहीं होती थी कि उनके बारे में सपने में भी गलत बात सोचें। वो हम सब से दूरी बना कर रखती थी। मैं नया नया आया था। इसलिए एकाध बार उनके साथ गरम जोशी से बात बढाने की गुस्ताखी कर चुका था। पर उनकी तरफ से आती बर्फीली हवाआें में मेरा सारा जोश काफूर हो गया। अब मुझे मालूम हुआ कि मेरे साथियों ने उनका नाम मिस आईस मैडेन क्यों रखा है। पर मुझे क्या पता था कि ऊपर वाले ह्यया ऊपर वाली हृ की मर्जी क्या है। एक दिन हमारे आफिस का नेटवर्क गडबडा गया। कभी ऑन होता तो कभी ऑफ। उसदिन शनिवार था। मैं दिन भर उसी में उलझा रहा पर उस गुत्थी को सुलझा नहीं पाया। आखिर थक कर मैंने मैडम को कहा कि अगले दिन यानि रविवार को सुबह नौ बजे आकर इस को ठीक करने की कोशिश करूंगा। मैंने उनसे आफिस की चाभियां ले लीं।

अगले दिन जब मैं नौ बजे ऑफिस पहुंचा तो देखा कि रचना मैडम मेन गेट के सामने खडी हैं। मैंने उन्हें विश किया और पूछा "आप यहां क्या कर रही हैं"।

वो बोलीं " बस ऐसे ही। घर में बोर हो रही थी तो सोचा कि यहां आकर तुम्हारी मदद करूं"। हम दरवाजा खोलकर अन्दर गए। मैडम ने कहा कि आज इतवार होने की वजह से कोई नहीं आएगा। इसलिए सुरक्षा के खयाल से दरवाजा अन्दर से बन्द कर लो। मैंने उनके कहे अनुसार दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया। अब पूरे आफिस में हम दोनों अकेले थे और हमें कोई डिस्टर्ब भी नहीं कर सकता था। मुझे रचना मैडम की नीयत ठीक नहीं लग रही थी। दाल में जरूर कुछ काला था। नहीं तो भला आज छुट्टी के दिन एक छोटी सी समस्या के लिए उन को दफ्तर आने की क्या जरूरत। मैडम घूम कर कम्प्यूटर लैब की तरफ चल दी और मैं भी मन्त्रमुग्ध सा उनके पीछे पीछे चल दिया। पूरे माहौल में उनके जिस्म की खुशबू थी। जब हम कॉरीडोर में थे तो मैंने उनकी पिछाडी पर गौर किया। हाय क्या फिगर था। हालांकि मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं पर यह दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर रचना मैडम किसी ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले तो अच्छे अच्छों की छुट्टी कर दें और देखने वाले अपने लन्ड संभालते रह जाएं। उनकी मस्तानी चाल को देख कर यूं लग रहा था मानो फैशन शो की रैम्प पर कैट वॉक कर रही हो। उनके चूतड पेन्डुलम की तरह दोनों तरफ झूल रहे थे। उन्होंने गहरे नीले रंग का डीप गले का चोलीनुमा ब्लाउज मैचिंग पारदर्शी साडी के साथ पहना था। उनकी पीठ तो मानो पूरी नंगी थी सिवाय एक पतली सी पट्टी के जो उनके ब्लाउज को पीछे से संभाले हुई थी। उन्होंने साडी भी काफी नीची बांधी हुई थी जहां से उनके चूतडों की घाटी शुरू होती है। बस यह समझ लो कि कल्पना के लिए बहुत कम बचा था। सारे पत्ते खुले हुए थे। अगर मुझमें जरा भी हिम्मत होती तो साली को वहीं पर पटक कर चोद देता। पर मैडम के कडक स्वभाव से मैं वाकिफ था और बिना किसी गलत हरकत के मन ही मन उनके नंगे जिस्म की कल्पना करते हुए चुप चाप उनके पीछे पाीछे चलता रहा। मैडम ने कल्पना के लिए बहुत ही कम छोडा था। साडी भी कस कर लपेटे हुई थी जिससे कि उनके मादक चूतड और उभर कर नजर आ रहे थे और दोनों चूतडों की थिरकन साफ साफ देखी जा सकती थी। मैंने गौर किया कि चलते वक्त उनके चूतड अलग अलग दिशाआें में चल रहे थे। पहले एक दूसरे से दूर होते फिर एक दूसरे के पास आते। मानो उनकी गान्ड खुल बन्द हो रही हो। जब दोनों चूतड पास आते तो उनकी साडी गान्ड की दरार में फंस जाती थी। यह सीन मुझे बहुत ही उत्तेजित कर रहा था और मन कर रहा था कि साडी के साथ साथ अपने लन्ड को भी उनकी गान्ड की दरार में डाल दूं। बडा ही गुदाज बदन था रचना मैडम का।

लैब तक पहुंचते पहुंचते मेरी हालत खराब हो गई थी और मुझे लगने लगा कि अब और नहीं रूका जाएगा। लैब के दरवाजे पर पहुंच कर मैडम एकाएक रूक कर पलटी और मुझसे ऊपर की सेल्फ के केबल कनेक्शन जांचने को कहा। उनकी इस अचानक हरकत से मैं संभल नहीं पाया और अपने आप को संभालने के लिए अपने हाथ उनकी कमर पर रख दिए। मैडम ने एक दबी मुस्कराहट के साथ कहा "कोई शैतानी नहीं" और मेरे हाथ अपनी कमर से हटा दिए। मैंने झेंपतेे हुए उनसे माफी मांगी और लैब में ऊपर की सेल्फ से कम्प्यूटर हटाने लगा। मैडम भी उसी सेल्फ के पास झुककर नीचे के केबल देखने लगी। उनकी साडी का पल्लू सरक गया जिससे कि उनकी चूचियों का नजारा मेरे सामने आ गया। हाय क्या कमाल की चूचियां थीं। एक पल को तो लगा कि दो चांद उनकी चोली में से झांक रहे हों। वो ब्रा नहीं पहने थी जिससे कि चूची दर्शन में कोई रूकावट नहीं थी। और काम करना मेरे बस में नहीं था। मैं खडे खडे उस खूबसूरत नजारे को देखने लगा। चोली के ऊपर से पूरी की पूरी चूचियां नजर आ रही थीं। यहां तक कि उनके खडे गुलाबी निप्पल भी साफ मालूम दे रहे थे। शायद उन्हें मालूम था कि मैं ऊपर से फ्री शो देख रहा हूं। इसीलिए मुझे छेडने के लिए वो और आगे को झुक गई जिससे उनकी पूरी की पूरी चूचियां नजर आने लगीं। हाय क्या नजारा था। मैं खुशी खुशी चूचियों की घाटी में डूबने को तैयार था। ऐस लगता था मानो दो बडे बडे कश्मीरी सेव साथ साथ झूल रहो हों।

एकाएक मैडम ने अपना सर ऊपर उठाया और मुझे अपनी चूचियों को घूरते हुए पकड लिया। जब हमारी नजर मिली तो अपने निचले होठ को दांतों में दबा कर मुस्कराते हुए बोली "ऐ क्या देखता है"। मैं सकपका गया और कुछ भी नहीं बोल पाया। मैडम ने मेरे चूतडों पर हल्की सी चपता जमा कर कहा " शैतान कहीं के। फ्री शो देख रहा है"।

मेरा चेहरा लाल हो गया उनके मुस्कराने के अन्दाज से मैं और भी उत्तेजित हो गया और मेरा लौंडा जीन्स के अन्दर ही तन कर बाहर निकलने को बेचैन होने लगा। मैंने अपनी जीन्स को हिला कर लन्ड को ठीक करने की कोशिश की पर मुझे इसमें कामयाबी नहीं मिली। लन्ड इतना कडा हो गया था कि पूछो मत। बस ऊपर ही ऊपर होता जा रहा था और मेरी जीन्स उठती ही जा रही थी। मैडम ने मेरी परेशानी भांप ली और शरारती मुस्कराहट के साथ बोली " ये तुमने पैन्ट में क्या छुपाया है जरा देखूं तो मैं भी"। जब तक मैं कुछ बोलूं उन्होंने खडे होकर मेरे लन्ड को पकड लिया और पैन्ट के ऊपर ही से कस कर दबा दिया।

"हाय बडा तगडा लगता है तुम्हारा तो। बडा बेताब भी है। बस ऐसा ही लन्ड तो मुझे पसन्द है"। मैं तो हक्का बक्का रह गया। मैडम रचना मेरे साथ फ्लर्ट कर रही हैं। मिस आइस मैडेन का यह गरम रूख देख कर मेरी तो बोलती ही बन्द हो गई और मैं उनकी हरकतें देखता रह गया। चूंकि मैं टेबल के ऊपर खडा था इस लिए मेरा लन्ड उनके मुंह की ठीक सीध में था। वो अपने चेहरे को और पास लाइंर् और पैन्ट के ऊपर ही से मेरे लन्ड को चूमते हुए बोली " इसे जरा और पास से देखूं तो क्यों इतना अकड रहा है"। ऐसा कहते हुए मैडम रचना ने मेरी जीन्स की जिप खोल दी। मैं आम तौर पर अन्डरवियर नहीं पहनता हूं। लिहाजा जिप खुलते ही मेरा लन्ड आजाद हो गया और उछलकर उनके चेहरे से जा टकराया।

"हूं ये तो बडा शैतान है। इसे तो सजा मिलनी चाहिए।" मैडम ने अपने सेक्सी मुंह को खोला और मेरे सुपाडे को अपने रसीले होठों में दबा लिया। मैं तो मूक दर्शक बन कर सातवें आसमान में पहुंच गया था। जिस मैडम रचना के पीछे सारा आफिस दीवाना था और जिनके बारे में सोच सोच कर मैंने भी औरों की तरह कई कई बार मुठ मारी थी यहां एक रंडी की तरह मेरा लौंडा चूस रही थी। मैंने मैडम का सर पकड कर अपने लौंडे पर दबाया और साथ ही साथ अपने चूतडों को आगे धक्का दिया। एक ही झटके में मेरा पूरा लन्ड मैडम के मुंह में कंठ तक घुस गया। उनका दम घुटने लगा और उन्होंने अपना सिर थोडा पीछे किया। मुझे लगा कि अब मैडम मुझे मेरे उतावलेपन के लिए डांटेगीं।

मैं बोला "सॅारी मैडम मैं अपने पर काबू नहीं रख पाया"।

उन्होंने बोलने से पहले मेरा लन्ड अपने मुंह से निकाला और मुस्कुराई "धत पगले। मैं तुम्हारी हालत का अन्दाजा लगा सकती हूं। लेकिन ये मैडम मैडम क्या लगा रखी है। तुम मुझे रचना कह कर बुलाओ ठीक है ना। अब मुझे अपना काम करने दो"। ऐसा कह कर मैडम ने एक हाथ में मेरा लन्ड पकडा और शुरू हो गई उसका मजा लेने में। वो लन्ड को पूरा का पूरा बाहर निकाल कर फिर दोबारा अन्दर कर लेती। मैं भी धीरे धीरे कमर हिला हिला कर उनका मुंह चोदने लगा। कुछ देर बाद वो बोली "बस इसी तरह खडे खडे कमर हिलाने में क्या मजा आएगा। थोडा आगे बढो"़।

मैंने उनका इशारा भांप लिया और पहले उनके गालों को सहलाया। फिर धीरे धीरे हाथो को नीचे खिसकाते हुए उनकी गर्दन तक पहुंचा और उनकी चोली का स्ट्रैप खोल दिया। दोनों मस्त चूचियां उछल कर बाहर आ गई। मैडम ने भी मेरी जीन्स खोल दी और बिना लन्ड मुंह से बाहर किए नीचे उतार दी। फिर लन्ड चूसते हुए वो अपनी चूचियों को मेरी जांघों पर रगडने लगी। मैंने थोडा झुक कर उनकी चूचियों को पकडा और कस कस कर मसलने लगा। जल्द ही हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए और हमारी सांसें तेज हो गई। मैं बोला "मैडम मैं पूरी तरह से आपको मजा नहीं दे पा रहा हूं। अगर इजाजत हो तो मैं भी नीचे आ जाऊं।"

मैडम ने मुझे गुस्से से देखा और हौले से सुपाडे को काट लिया। वो बोली "तुम मेरी बात नहीं मान रहे हो। अगर मैं बोलती हूं कि मुझे रचना कह कर पुकारो तो तुम मुझे रचना ही कहोगे मैडम नहीं।"

मैं बोला "सॉरी रचना अब तो मुझे नीचे आने दो।" रचना ने मेरा हाथ पकड कर नीचे उतरने में मदद की। नीचे आते ही मैंने उनके चूतडों को पकडा और अपने पास खींच कर होठों को चूमने लगा। अब मैं उनके होठों को चूसते हुए एक हाथ से चूतड सहला रहा था जबकि मेरा दूसरा हाथ उनकी चूचियों से खेल रहा था। रचना मेरे लन्ड को हाथ में पकड कर सॉफ्ट टॉय की तरह मरोड रही थी। मैंने रचना की साडी पकड कर खींच दी और पेटीकोट का भी नाडा खोल कर उतार दिया। रचना ने भी मेरी टी शर्ट उतार दी और हम दोनों ही पूरी तरह नंगे हो गए। एक दूसरे को पागलों की तरह चूमते हुए हम वहीं जमीन पर लेट गए। चूत की खुशबू पा कर मेरा लन्ड फनफनाने लगा। रचना भी गर्म हो गई थाी और अपनी चूत मेरे लन्ड पर रगड रही थी। हम दोनों एक दूसरे को कस कर जकडे हुए किस करते हुए कमरे के कालीन पर लोट पोट हो रहे थे। कभी मैं रचना के ऊपर हो जाता तो कभी रचना मेरे ऊपर। काफी देर तक यूं मजे लेने के बाद हम दोनो बैठ कर अपनी फूली हुई सांसों को काबू में करने की कोशिश करने लगे।

रचना ने अपने बाल खोल दिए। मैं बालों को हटा कर उनकी गर्दन को चूमने लगा। फिर दोबारा उनके प्यारे प्यारे होठों को चूमते हुए उनकी चूचियों से खेलने लगा। रचना मेरा सिर पकड कर अपनी रसीली चूचियों पर ले गई और अपने हाथ से पकड कर एक चूची मेरे मुंह में डाल दी। मैं प्यार से उनकी चूचियों को बारी बारी से चूमने लगा। वो काफी गरम हो गई थी और मुझे अपने ऊपर ६९ की पोजिशन में कर लिया। मैं उनकी रसीली चूत का अमृत पीने लगा। रचना अपनी जीभ लपलपा कर मेरे लौंडे को चूसे जा रही थी। जब भी हम में से कोई भी झडने वाला होता तो दूसरा रूक कर उसको संभलने का मौका देता। कई बार हम दोनों ही किनारे तक पहुंच कर वापस आ गए। हमारी वासना का ज्वार बढता ही जा रहा था और बस अब एक दूसरे में समा जाने की ही बेकरारी थी।

रचना ने मुझे अपने ऊपर से उठाया और खुद चित्त हो कर लेट गई। अपने दोनों पैर उठा कर अपने हाथों से पकड लिए और मुझे मोर्चे पर आने को कहा।मैंने भी रचना के दोनों पैरों को अपने कन्धों पर टिकाया और लन्ड को उसकी चूत के मुंह पर रख कर धक्का लगाया। मेरा लोहे जैसा सख्त लौंडा एक ही झटके में आधा धंस गया। रचना के मुंह से उफ की आवाज निकली पर अपने होठों को भींच कर नीचे से जवाबी धक्का दिया और मेरा लन्ड जड तक उसकी चूत में समा गया। फिर मेरी कमर पर हाथ रख कर मुझे थोडा रूकने का इशारा किया और बोली "तुम्हारा लन्ड तो बडा ही जानदार है। एक झटके में मेरी जान निकाल दी। अब थोडी देर धीरे धीरे अन्दर बाहर कर के मजा लो।"

रचना के कहे मुताबिक मैं धीरे धीरे उसकी चूत में लन्ड अन्दर बाहर करने लगा। चूत काफी गीली हो चुकी थी इसलिए मेरे लन्ड को ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी। मैं धीरे धीरे चूत चोदते हुए रचना की मस्त चूचियों को भी मसल रहा था। बडी ही गजब की चूचियां थी उसकी। एक हाथ में नहीं समा सकती थी। पर इतनी कडी मानो कन्धारी अनार। वो चित्त लेटी हुई थी पर चूचियों में जरा भी ढलकाव नहीं था और हिमालय की चोटियों की तरह तन कर ऊपर को खडी थी। उत्तेजना की वजह से उसके डेढ इन्च के निप्पल भी तने हुए थे और मुझे चूसने का आमन्त्रण दे रहे थे। मैै दोनों निप्पलों को चुटकी में भर कर कस कस कर मसल रहा था। रचना भी सिसकारी भर भर कर मुझे बढावा दे रही थी। आखिर मुझसे नहीं रहा गया और उसके पैरों को कन्धे से उतार कर जमीन पर सीधा किया और उसके ऊपर पूरा लम्बा होकर लेट गया। रचना ने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को पकड कर पास पास कर लिया और मैं दोनों निप्पलों को एक साथ चूसने लगा। ऐसा लग रहा था कि सारी दुनिया का अमृत उन चूचियों में ही भरा हो। मैं दोनों हाथों से चूचियों को मसल रहा था।

चूचियों की मसलाई और चुसाई में मैं अपनी कमर हिलाना ही भूल गया। तब रचना अपने हाथ नीचे करके मेरे चूतडों पर ले गई और उन्हें फैला कर एक उंगली मेरी गान्ड में पेल दी। मैं चिहुंक गया एक जोरदार धक्का रचना की चूत में लगा दिया। रचना खिलखिला कर हंस पडी और बोली "क्यों राज्जा मजा आया। अब चलो वापस अपनी डियूटी पर।"

रचना का इशारा समझ कर मैं वापस कमर हिला हिला कर उसकी चूत चोदने लगा। रचना भी नीचे से कमर उठाने लगी और धीरे धीरे हम दोनों पूरे जोश के साथ चुदाई करने लगे। मैं पूरा लन्ड बाहर खींच कर तेजी से उसकी चूत में पेल देता। रचना भी मेरे हर शॉट का जवाब साथ साथ देती। पूरे कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। जैसे जैसे जोश बढता गया हमारी रफ्तार भी तेज होती गई। आखिर उसकी चूचियों को छोड मैंने उसकी कमर को पकड कर तूफानी रफ्तार से चुदाई शुरू कर दी। रचना भी कहां पीछे रहने वाली थी। वो भी मेरी गर्दन में हाथ डाल कर पूरे जोश से कमर उछाल रही थी। अब ऐसा लगने लगा था कि हम दोनों ही अपनी अपनी मंजिल पर पहुंच जाएंगे पर रचना तो एक्सपर्ट चुदक्कड थी और अभी झडने के मूड में नहीं थी। उसनेे अपनी कमर को मेरी कमर की दिशा में ही हिलाना शुरू दिया। इससे लन्ड अन्दर बाहर होने के बजाए चूत के अन्दर ही रह गया। मेरी पीठ पर थपकी दे कर उन्होंने रफ्तार कम करने को कहा और बोली "थोडा सांस ले ले फिर शुरू होना। इतनी जल्दी झडने से मजा पूरा नहीं आएगा।"

मैंने किसी तरह अपने को संभाल कर रफ्तार कम की। मैं अब उसके रसीले होठों को चूसते हुए हौले हौले चोदने लगा। जब हम दोनों की हालत संभली तो दोबारा रचना ने फुल स्पीड चुदाई का इशारा किया और फिर से मैं पहले की तरह चोदने लगा। रूक रूक कर चुदाई करने में मुझे भी मजा आ रहा था। हमारी इस चुदाई का दौर आधा घन्टे से भी ज्यादा चला। कई बार मेरे लन्ड में और उसकी चूत में उफान आने को हुआ और हर बार हमने रफ्तार कम करके उसे रोक लिया। हाालांकि कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनो पसीने से नहा गए। आखिर रचना ने मुझे झडने की इजाजत दी। मैं तूफान मेल की तरह उसकी चूत में धक्के लगाने लगा। वो भी कमर उछाल उछाल कर मेरी हर चोट का जवाब देने लगी। चरम सीमा पर पहुंच कर मैं जोर से चिल्लाया "रचनााााााााा मेरी जान। मैं आया" और उसकी चूत में जड तक लन्ड घुसा कर अपना सारा उफान उसके अन्दर डाल दिया। रचना ने भी मेरी पीठ पर अपने पैर बांध कर मुझे कस कर चिपका लिया और चीखती हुई झड गई।

रेल यात्रा:एक कहानी

मेरा नाम मानिक कपूर है। मै पेशे से एक फोटोग्राफर हूँ मुम्बई मे रहता हूँ।मेरा अक्सर शूटिंग के लिये बाहर जाना होता रहता है। ऐसे ही एक शूटिंग के लिये मै एक बार गोवा गया था। मेरे लिये यह एक बहुत ही मजेदार अनुभव था। अपनी शूटिंग के बाद कुछ दिन के लिये मै अकेला गोवा मे रूक गया था। मैने टे्रन से आने का फैसला किया। मैने ए सी कम्पार्टमेण्ट मे अपने लिये एक सीट रिजर्व कराया। यह गोवा का ऑफ सीजन था इसलिये टे्रन मे बिल्कुल भी भीड नहीं थी। मुझे बहुत आसानी से टे्रन का टिकट मिल गया। शाम को छ: बजे मेरी टे्रन मडगाव स्टेशन से छूटी। मेरे कम्पार्टमेन्ट मे मुझे सिर्फ दो लोग दिखे लेकिन उनकी भी सीट डिब्बे के दूसरे कोने मे थी। टे्रन वहॉ से चली और कुछ देर मे ही कोइ स्टेशन आया। जहॉ पर एक लडकी जो कि बहुत ही मार्डन ड्रेस मे थी मेरे कम्पार्टमेण्ट मे आयी और मेरे भाग्य से उसकी सीट मेरे सीट के बगल मे थी। उसने मेरे केबिन मे प्रवेश किया। वह मुस्करायी और उसने अपना हाथ आगे बढा दिया।

हाय मै आलीन ।

मै भी मुस्कराया मन ही मन मुझे खुशी हो रही थी चलो अब मेरा रास्ता कम बोरिग होगा। हम दोनो का वार्तालाप शुरू हुआ। वह काफी बोल्ड किस्म की लडकी थी। उसका सेक्सी फिगर मुझे उसकी तरफ लगातार आकर्षित कर रहा था। बातो बातो मे हम एक दूसरे के बारे मे काफी कुछ जान गये थे। वह मॉडलिग के लिए मुम्बई आ रही थी। इसके पहले उसने एक दो एडवरटीजमेन्ट मे काम किया था। मेरे बारे मे जानने के बाद उसने मेरे मे ज्यादा इन्टे्रस्ट लिया। मेरे केबिन की हल्की नीली लाइट ऑन थी उसने केबिन का कर्टन खींचा जिससे हमे बाहर से कोइ अवरोध न मिले।वह मेरे सीट पर बैठी थी हम दोनो काफी पी रहे थे। हम दोनो की बाते और आगे बढी और फिर फ्िल्म इन्डस्ट्री और उसके आकर्षक लाइफ के बारे मे होने लगी। रात काफी हो चुकी थी हमारे डिब्बे मे जो भी दो चार लोग थे अपने केबिन मे सो चुके थे। क्योकी कहीं से कोइ आवाज नही आ रही थी। हम दोनो अभी भी अपनी बातो मे मशगूल थे। वह मेरे से काफी सटकर बैठी थी जिससे हम टे्रन के झटको से कभी कभी हल्के से छू जाते थे। अचानक मैने उसके हाथ को अपने हाथ पर पाया मैने उसकी तरफ देखा वह मुस्करायी बस मुझे हरी झंडी मिल गयी।

मैने उसका हाथ अपने हाथ मे ले लिया और चूम लिया। उसके कन्धो पर अपना हाथ रखकर उसे अपनी ओर खीच लिया। वह आसानी से मेरे ऊपर आ गिरी। मैने उसके होठो पर अपने होठ रख दिये। उसके होठ बहुत ही मुलायम और गुदाज थे। उसकी सॅासे काफी गरम थी। मै उसके निचले होठो को अपने दोनो होठो के बीच रखकर उन्हे चूसने लगा। उसके हाथो की अंगुलियॉ मेरे बालो मे उलझी हुई थी। उसने मेरी जीभ को अपने मुॅह मे लिया और बहुतही मजेदार ढंग़ से चूस रही थी। मेरा प्राइवेट अंग पैन्ट के भीतर उफान मार रहा था।

मेरा हाथ उसकी पीठ पर द्यूमते हुये उसकी कमर के नीचे तक पहुॅच गया। मैने अपना हाथ उसकी टाईट टी शर्ट मे डाल दिया। धीमे धीमे मेरा हाथ उसकी दोनो गोलाइयो के नजदीक तक पहुॅच गया। मेरे हाथ उसकी ब््राा को महसूस करने लगे। मै उसकी दोनो गोलाइयो को अपने हाथो मे लेने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे इतनी बडी थी कि मेरे हाथो मे नही आ रही थी। इस बीच हम दोनो ने एक दूसरे को चूमना जारी रखा। उसकी हरकते मुझे ब्हुत ही ज्यादा उत्साहित कर रही थी।

अचानक मैने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी पैन्ट पर पर था। मेरा प्राइवेट अंग मेरे पैन्ट को फाडकर बाहर आने को तैयार था। वह मेरे सख्त हो चुके अंग को मेरे पैन्ट के ऊपर से रगड रही थी। उसने मेरी पैन्ट की जिप खोल दी और अपना हाथ मेरे पैन्ट के अन्दर डाल दिया और मेरे जननांग को पकड लिया। मेरी हालत बहुत बुरी हो रही थी। उसने मेरी पैन्ट खोल दी और अन्डरवियर को नीचे की तरफ सरकाकर मेरे जननांग को पकड लिया। मै अपनी सीट पर ही बैठा था वह अपनी जगह से उठी और मेरे जननांग को उसने अपने मुॅह मे ले लिया। वह बहुत हॉट थी उसका यह सब करना मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मुझे लगा कि अगर मैने उसे अपने जननांगो से और खेलने दिया तो मेरा वीर्य बाहर आ जायेगा।

मैने उसे उठाया और अपनी सीट पर वापस बिठाया मैने उसके टी शर्ट को ऊपर करके उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसकी दोनो बडी बडी खूबसूरत गोलाइयॉ मेरे सामने बिल्कुल फ्री होकर झूलने लगी। उसकी गोलाइयॉ एकदम टाइट थीं मै उन्हे अपने हाथ मे लेकर दबाने लगा। उसके चेहरे पर मै बेचैनी का आलम देख रहा था। मैने उसके एक निप्पल को अपनी अंगुलियो मे लेकर उसे धीमे से मसला। उसके मुॅह से एक आह की ध्वनि निकल गयी। मै झुककर उसके दूसरे निप्पल को अपने मुॅह मे ले लिया और उसे अपनी जीभ से सहलाने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि उसके बूब्स अब और बडे हो गये थे।

अब मेरे हाथ उसके जॉद्यो से होते हुये उसके गुप्तांगो पर पहुॅच गये उसने शार्ट पैन्ट पहन रखा था। मैने कैसे भी उन्हे खोला और उसके अन्डरवियर को नीचे किया। उसके गुप्तांग पर एक भी बाल नही थे। मेरी अंगुलिया उसके गुप्तांग मे समा गयी। मै अपनी अंगुली को उसके गुप्तांग मे अन्दर बाहर करने लगा। मै उठकर नीचे बैठ गया और उसके गुप्तांग पर अपनी जीभ रख दी। उसकी मादकता बढती जा रही थी। उसने मेरे बालो को पकडकर मेरे सर को अपनी जॉद्यो में फॅसा लिया। जैसे जैसे मेरी जीभ अपना काम कर रही थी वह और भी उत्तेजित होती जा रही थी। मैने अपने आपको उसकी मजबूत पकड से मुक्त किया और उसके कपडो को निकाल कर उसके पैरो को फैलाया। उसकी सेक्सी चूत मेरे सामने थी जो कि मुझे आमन्त्रित कर रही थी।मैने एक पल की भी देरी किये बिना अपने लण्ड को उसके चूत पर रखा और उसके अन्दर प्रवेश कर गया। और फिर एक दूसरे को धक्के देने का सिलसिला चालू हो गया। हम दोनो की स्पीड बढती जा रही थी। उसके पैर हवा मे खुले हुये थे जिससे मुझे उसके अन्दर तक समाने मे आसानी हो रही थी। मेरा लन्ड तेजी से उसके अन्दर बाहर हो रहा था। एक जबरदस्त द्यर्षण मेरा लण्ड उसके चूत की दीवारो पर उत्पन्न कर रहा था। हम दोनो आनन्द की एक दूसरी दुनिया मे तैर रहे थे। उसकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा जो कि ल्यूब्रीकेण्ट का काम करने लगा । हम दोनो अपनी चरम सीमा के नजदीक पहूॅच रहे थे । हमारे जननांगो से फच्च फच्च की आवाजे आने लगी थी।आलीन ने मुझे कसकर पकड रखा था। हमारे अन्दर एक जबरदस्त तूफान उबाल मार रहा था। मेरी स्पीड बढती जा रही थी और थोडी देर मे ही हम दोनो अपने चरम सीमा पर पहुॅच गये। हम दोनो के अन्दर एक लावा था जो कि फूट पडा।

हम दोनो के शरीर शान्त हो गये। हम थोडी देर तक एक दूसरे की बॉहो मे पडे रहे। यह मस्ती का दौर रात मे फिर चला। यह मेरी सबसे यादगार ट्रेन यात्रा थी।

समाप्त

ओवरटाइम:एक कहानी

हाय मेरा नाम निशा है। मेरी उम्र २६ वर्ष है। मैं एक प्राइवेट कम्पनी के मुख्य आफिस में काम करती हूॅ। दो वर्ष पहले मेरा मेरे पति से तलाक हो गया है। मैं आपको अपने बॉस के साथ पहली बार के सेक्स अनुभव के बारे मे बता रही हूॅ। मेरे बॉस जिनकी उम्र ३५ के लगभग थी उन्होने मुझे अपने केबिन में बुलाया। उन्होने मुझसे रिक्वेस्ट की क़ि आज मैं अगर शाम को थोडी देर रूक जाऊॅ क्योंकी आज काम ज्यादा है। मैने उन्हें हॉ कह दी और अपने केबिन में लौट आयी। शाम के छ: बज चुके थे सब लोग अपने द्यर के लिये निकल रहे थे। बॉस ने मुझे अपने केबिन में बुलाया। और कुछ फाइलें मेरे सामने रख दी जिन्हें मुझे चेक करना था। बॉस ने हमारे चपरासी से बोला कि वह भी जा सकता है क्योकी वह आज देर तक रूकेगा।

शाम के सात बज रहे थे ऑफिस मे कोइ भी नही था। हम दोनो अपने काम में व्यस्त थे। कुछ देर बाद मेरे बॉस ने मुझसे पुछा कि क़्या मैं कॉफी लेना पसन्द करूॅगी मैने हॉ मे सर हिलाया। उन्होने कॉफी बनायी और मेरे लिये उन्होने टेबल पर रखा। काम लगभग खत्म होने को था। हम कॉफी पी रहे थे कि बॉस ने मेरे बारे में पूछना शुरू कर दिया। उन्होने मुझसे पूछा कि क्यों मैने अपने हसबैंड से तलाक लिया। उन्होने पूछा कि म़ेरी सेक्सुअल जिन्दगी कैसी थी। मुझे उनके इस प्रश्न के उत्तर देने में झिझक सी हुयी। मैंने कहा कि ठ़ीक थी। फिर वह अपने बारे में बताने लगे कि उनकी और उनकी पत्नी के बीच सम्बन्ध कुछ अच्छे नहीं थे। बातों बातों में उन्होने मुझसे मेरे सेक्स विचारो को पूछा। मुझे थोडा शर्म आयी।वो अपनी कुर्सी से उठकर मेरे पास आये और मेरे कन्धों पर अपना हाथ रखा और पूछा कि क्या वो मेरे साथ आनन्द उठा सकते है। वो मेरा बॉस था यह वो अच्छी तरह से जानता था। यही बात मेरे दिमाग मे आयी लेकिन उसने मुझे कुछ भी कहने का मौका नही दिया। उन्होनेे अपना हाथ मेरी छाती पर रक दिया। मैंने साडी पहन रखी थी म़ेरे उभारों को कपडों के ऊपर से कस कर भींच दिया। एक अरसे के बाद मेरे बदन पर किसी मर्द का हाथ था। मैं विरोध नहीं कर पायी। मुझे अब इसकी सख्त जरूरत महसूस होने लगी थी।
मेरे कानों में एक आवाज आयी ।ऩिशा मुझे इन्हें देखने दो।नहीं प्लीज।
इसके अलावा मेरे मुँह से कुछ नहीं निकला। लेकिन उन्होने कुछ भी नहीं सुना और मेरी साडी मेरे सीने के ऊपर से गिरा दी। मेरे बूब्स को मेरे ब्लाउज के ऊपर से दबाया। मेरे मुँह से एक आह सी निकल पडी । उन्होने मेरी वासना को भड़का दिया था। मैं उनके हाथों का बहुत हल्का सा विरोध कर रही थी जो मेरे बलाउज को खोल रहे थे। लेकिन सच्चाई यह थी की मेरा मन यह सब खुशी से स्वीकार कर रहा था। उन्होने मेरे ब्लाउज को खोल दिया और अगले ही पलों मे उन्होने मेरे ब्रा को भी खोल कर उन्हें नीचे गिरा दिया। मैं उनके सामने आधी नंगी खडी थी। मैं अभी तक उस कुर्सी पर ही बैठी थी। मेरे बूब्स को अपने हाथो मे लेकर वे उसके साथ खेलने लगे। मुझे पूरा आनन्द आ रहा था मेरी ऑखे बन्द थी। उन्होने मुझे उनके कपडे उतारने को कहा। मैंने उनकी पैंट शर्ट और अन्डरवियर उतार दी। उनका लण्ड काफी बडा और मोटा था जिसे देखकर मैं अपने को रोक नहीं पायी और पूरा का पूरा लण्ड मैंने अपने मुॅह में ले लिया। मैंे उनके लण्ड को चूसने लगी। थोडी देर मे मेरे बॉस अपने लण्ड को मेरे मुॅह में अन्दर बाहर करने लगे। मुझे लगा कि अब उनका वीर्य निकल जायेगा तो मैंने चूसना बन्द कर दिया और खडी हो गयी।
उन्होने मेरे सारे कपडे झटके में निकाल डाले और पास ही पडे सोफे पर मुझे लिटाया। उन्होने मेरे पैरो को फैलाया और अपनी अंगुली को मेरी चूत में डालकर उसे अन्दर बाहर करने करने लगे। थोडी देर में मुझसे बरदाश्त के बाहर हो गया मैने उनसे कहा प्लीज सर जल्दी कीजिये अब बरदाश्त नहीं होता। वे एक पल की भी देरी किये बिना मेरी जांद्यो के बीच पहुॅच गये और अपना लण्ड मेरी चूत में द्युसा दिया। उनका लण्ड सरसराते हुये मेरी चूत की दीवारों को रगडता हुआ अन्दर तक पहुॅच गया। और अगले ही पल वह बाहर की ओर मैं स्वर्ग में थी। इतने दिनो के बाद पहली बार कोई पुरूष मेरे शरीर के साथ खेल रहा था। मैं अपनी चूचियों को अपने हाथो मे लेकर मसल रही थी और उधर मेरे बॉस मेरी चूत को जबरदस्त ढ़ग से चोद रहे थे। उनका लण्ड बहुत तेजी से मेरी चूत के अन्दर बाहर हो रहा था। मैं अपने चरमोत्कर्ष पर पहुॅच गयी और मेरी चूत से गरम पानी निकलने लगा। मेरे बॉस ने मुझे कसकर पकड लिया और तेजी से मुझे चोदने लगे। मुझे मालुम था उनका वीर्य अब बाहर निकलने वाला था। उनका लण्ड तेजी से मेरी चूत के अन्दर बाहर होने लगा। मैने उनसे बोला सर प्लीज अपना वीर्य मेरी चूत मे मत डालियेगा वरना मैं प्रेगनेन्ट हो जाऊॅगी। उन्होने अपने लण्ड को निकाला और मेरे मुॅह मे डाल दिया और अपने हाथों से हिलाने लगे । मेरा मुँह उनके वीर्य से भर गया।

आगे जारी...(लेकिन तभी जब आप कमेन्ट लिखेंगे)

Friday, November 18, 2005

जो चाहो वो पाओ

यहाँ पर मै आपसे कोई फालतू बात नही करने वाली साफ़ और सीधी सीधी सेक्स की बाते ही करूंगा। सेक्स एक ऐसा शब्द है, जो हर व्यक्ति देखना चाहता है, पाना चाहता है, अकेले कोई लौन्डिया मिल जाय तो चोदे बिना नही छोडेगा, लेकिन सबके सामने इतना शरीफ़ बनता है कि बस पूछो ही मत।

तो अब बात की जाये, चूत और लण्ड की। लेकिन उससे पहले मुझे आप सभी की राय चाहिये। आपको पसन्द हो तो अपनी टिप्पणी करो....नही तो मै तो जा रहा हूँ ठोकने, मेरे को क्या पड़ी है खांम खा मे गान्ड मराऊँ।

तब तक के लिये....... अपना अपना खड़ा रखिये।

मस्तराम